रविवार, 20 दिसंबर 2009

आप सबका प्यार और आशीर्वाद.... मेरा आभार...और मिलिए मेरी सन्यासन गर्ल फ्रेंड से....: महफूज़



मेरा लेख "जानना नहीं चाहेंगे आप संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य? एक ऐसा शब्द जो सिर्फ भारत में ही पाया जाता है... :- महफूज़" का प्रकाशन दिनांक १९/दिसंबर/२००९ को राष्ट्रीय हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' के सम्पादकीय पृष्ठ पर जिनका मैं आभारी हूँ. मैं अपनी इस सफलता का श्रेय सर्वप्रथम मम्मी जी रश्मि प्रभा जी को देता हूँ जिनका आशीर्वाद हमेशा से मेरे साथ है. मैं आदरणीय समीरलाल जी का भी आभारी हूँ जिन्होंने हमेशा से ..जब से मैंने ब्लॉग्गिंग शुरू कि ... मेरा मार्गदर्शन किया... मुझे हमेशा अच्छा लिखने को प्रेरित किया... जब जब मेरा संबल टूटा आपने मुझे संभाला... मैं आपका आभारी हूँ. 


मैं श्री. अजित वडनेरकर जी का भी आभारी हूँ.... जिन्होंने हमेशा मेरे लेखन को निखारने में मेरी मदद की... मैं श्री. अजित जी से मुआफी भी चाहता हूँ... कि कई जगह पर मैंने आपकी बात नहीं मानी... जिसका असर मेरे लेखन पर भी पड़ा..अभी दो दिन पहले मैंने आपसे शिकायती लहजे में झगडा भी किया... पर आपका बड़प्पन ... आपने मेरे शिकायत को बाल-सुलभ प्रवृत्ति कह कर बहुत खूबसूरती से नज़रंदाज़ कर दिया...   आपकी हर बात को ध्यान में रख कर ... गंभीर लेखन पर ध्यान दूंगा.... आप ऐसा ही आशीर्वाद बनाये रखिये..


मैं श्री. शरद कोकस जी के बारे में क्या कहूँ.... अगर यह नहीं होते तो शायद मैं कई मोड़ पर टूट गया होता.... आप चौबीस घंटे मेरे साथ रहते हैं... भावनात्मक रूप से हमेशा मेरे साथ रहते हैं... मैं इन्हें रात के ३ बजे भी उठा कर परेशां करता हूँ... कई बार मेंटली परेशां रहा तो इन्हें २ बजे जगाया.... और आप भी ऐसे कि जब तक के मैंने फोन नहीं रखा तब तक के आप मुझसे बात करते रहे.... आप ऐसे हैं कि जिनसे हर प्रकार के इमोशन बाँट सकता हूँ.... आपका मैं आभारी हूँ.... ऐसे ही स्नेह बनाये रखिये.... 


श्री. अनिल पुसदकर भैया.... आपने जो प्यार और इज्ज़त मुझे दी उसका मैं आपका बहुत आभारी हूँ...


अब श्री. गिरिजेश राव जी.... इनके बारे में क्या कहूँ? इनसे मेरी अभी हाल कि ही मुलाक़ात है.... जब कि हमारा गृहनगर एक है.... हम लखनऊ में भी एक ही जगह रहते हैं... हमारे घर भी आस पास ही हैं.... इनसे मेरा ऐसा रिश्ता बन गया है.... कि लगता ही नहीं कि हाल कि ही मुलाक़ात है... इनसे मैं अपना frustration निकालता हूँ.... और आप ऐसे कि मेरी हर अच्छे बुरे को सुनते हैं.... आपसे बातें करते हुए ...मुझे कई टोपिक्स मिले हैं.... जिन पर मैं अच्छा काम कर सकता हूँ. आप जैसा मित्र पा कर मैं धन्य हूँ. 


डॉ. अरविन्द मिश्रा जी... आपका बहुत आभारी हूँ. आप मुझे बहुत अच्छे से समझते हैं, स्नेह बनाये रखिये.


वाणी दी... आपका भी बहुत आभारी हूँ... मैं इन्हें बहुत परेशां करता हूँ.... कई बार आप  मेरी टिप्पणी पर जब मुझे कहती हैं कि तू बहुत पिटेगा.... तो मैं अभीभूत हो जाता हूँ....  आपका स्नेह इस छोटे भाई पर ऐसा ही बना रहे. 


श्री.पाबला जी... आप ऐसे शख्स हैं .... जिनके कंधे पर मै सर रख कर रोता हूँ... और आपकी वो सांत्वना वाली थपकी मैं यहाँ महसूस करता हूँ. आपका भी आभारी हूँ. 


कहते हैं कि पिछला जन्म जैसी कोई चीज़ नहीं होती.. अगर होती है... तो श्री खुशदीप सहगल भैया... ज़रूर पिछले जन्म में मेरे भाई रहे होंगे, आपके स्नेह से मैं अभिभूत हूँ. 


श्री. एम्.एल. वर्मा जी... आपके स्नेह में मैं डूबा रहता हूँ. स्नेह बनाये रखिये.


श्री. जी.के. अवधिया जी... आप अपना स्नेह व आशीर्वाद ऐसे ही बनाये रखिये..


श्री. रूपचंद्र शास्त्रीजी... आप मेरे पितातुल्य हैं... आपके द्वारा दिया गया मार्गदर्शन... ने हमेशा मेरे लेखन में एक निखार लाया. आपको सादर वंदन. 


श्री.राजीव तनेजा जी... आपका आभार... आप जैसा मित्र अपने जीवन में पा कर मैं धन्य हूँ...


श्री.अजय कुमार झा जी... आपका संबल हमेशा मेरे साथ रहा है. 


श्री.अलबेला खत्री जी...आपका भी बहुत आभारी हूँ... अभी परसों आपका प्रोग्राम टी.वी. पे देखा .. तो रात में बारह बजे आपको मैंने डिस्टर्ब किया... स्नेह बनाये रखिये..


 शिवलोक जी, राजे शा जी, पं.डी.के.शर्मा"वत्स" जी, ललित शर्मा जी, विनय जी, ताऊ जी, योगेन्द्र मौदगिल जी, राज सिन्ह जी, 
मनोज कुमार जी, सी.एम्. परशाद जी, डॉ. टी. एस. दराल जी, धीरू सिंह जी, divine preaching ji, डॉ. टी. एस. दराल जी, syed , 
परमजीत बाली जी, विवेक रस्तोगी जी,  जयंती जैन जी, गिरीश बिल्लोरे जी, महेंद्र मिश्र जी,  अजय कुमार जी, का भी
आभारी हूँ... आप सबके कमेन्ट मेरा हौसला बढ़ाते हैं.


रश्मि रविजा जी.... आपका आभारी हूँ, आपने हमेशा मेरा अच्छा चाहा है.. छोटे भाई की गलतियों को नज़रंदाज़ करते हुए.. हमेशा अच्छा समझाया, और ज़रूरत पड़ने पर डांटा भी.


शिखा वार्ष्णेय जी... आपने हमेशा मेरे लेखन को संपादित कर के ... एक मूर्त रूप दिया है. हिंदी में बहुत स्पेलिंग मिस्टेक करता हूँ न... आज आपका जन्मदिन भी है. आपको बहुत बहुत बधाई.


वंदना गुप्ता जी... मैं आपका बहुत आभारी हूँ.. आपको बड़ी बहन के रूप में पा कर मैं अभीभूत हूँ... जब जब मैंने गलत किया या लिखा आपने हमेशा मुझे समझाया... और मुझे गुस्से पर कण्ट्रोल करना सिखाया..


मीनू दीदी... आपके स्नेह से मैं अभिभूत हूँ. आपने हमेशा मेरी प्रशंसा की और मुझे अच्छा लिखने को प्रेरित किया....


अदा जी... आपके बारे में क्या कहूँ? आपने तो मेरा हर अच्छे बुरे में साथ दिया...  


मैं निर्मला कपिला mom, का भी बहुत आभारी हूँ... आपका आशीर्वाद ऐसे ही बना रहे.


लावण्या शाह जी.... एक दिन आपसे बात करते हुए ...कब मूंह से माँ संबोधन निकल गया पता ही नहीं चला.... आपके स्नेह से अभिभूत हूँ, आप ऐसे ही स्नेह व आशीर्वाद बनाये रखिये...


पी.सी.गोदियाल जी... आप जैसा मित्र पा कर मैं धन्य हूँ.


सुरेश चिपलूनकर जी... आप जैसा बड़ा भाई पा कर मैं अभिभूत हूँ. स्नेह बनाये रखिये.


महाशक्ति (परमेन्द्र), सौरभ चैटर्जी,मुरारी पारीक, दीपक, दिगंबर नस्वा, रवि श्रीवास्तव, राकेश सिंह, संजय बेंगानी, ओम् आर्य,जाकिर अली व सलीम खान जैसे मित्र मेरे जीवन में एक ख़ास जगह रखते हैं. 


संगीता पूरी जी, इंदु पूरी जी, सीमा गुप्ता जी, संगीता जी, बबली जी, अल्पना वर्माजी, हरकीरत जी , रचना दीक्षित जी, वंदना अवस्थी जी, प्रज्ञा पाण्डेय जी, फिरदौस खान जी, अलका सर्वत जी, रेखा दी, सुनीता शानू दी, शबनम खान, कविता किरण जी, तरन्नुम, सदा (सीमा सिघल) जी , ख़ुशी जी, दीप्ती, आशा जोगलेकर जी, शेफाली पाण्डेय जी, शोभना चौधरी, शमाजी, प्रीती दी, साधना जी, संध्या गुप्ता जी, रंजना भाटिया जी, ज्योति सिंह जी, ज्योति वर्मा... आपका सबका बहुत आभारी हूँ... आप सबकी टिप्पणियां.... मेरा हौसला बढ़ाती हैं... आप सबके स्नेह से मैं अभिभूत हूँ. 


मैं अपने छोटे भाइयों:०-
१. मिथलेश दुबे
२. अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी 
३. अम्बुज
४. अमृत पाल सिंह 
५. दर्पण 
५. अपूर्व
५. अर्कजेश
६. संजय व्यास
७. प्रतीक
८. सागर
९. सुलभ सतरंगी
१०. कुश
११. अनिल कान्त
१२. प्रबल प्रताप सिंह
१३. शिवम् मिश्र
१४. पंकज मिश्र 
१५. शाहिद मिर्ज़ा
१६. विनोद कुमार पाण्डेय
१७. चन्दन कुमार झा 
१८. श्रीश पाठक
१९. संजय भास्कर
२०. हिमांशु
२१. संजय भास्कर 
२२. लोकेन्द्र
२३. अबयज़ खान

का शुक्रगुज़ार हूँ. मेरे छोटे भाइयों का स्नेह हमेशा मेरे साथ रहा है. मिथलेश से अगर एक दिन बात नहीं होती है तो बहुत बेचैनी बढ़ जाती है. 
अंत में मैं अपनी रामप्यारी का थैंकफुल  हूँ...  जिससे की मैं बहुत प्यार करता हूँ.... यह मेरी ब्लॉगर गर्ल फ्रेंड है... मैं अपने फ्लर्ट के लिए विश्व-प्रसिद्ध हूँ... (यह मेरा ही फैलाया हुआ भ्रम है...) अरे! भई होऊं भी क्यूँ न? पर रामप्यारी से पूछ लीजिये .... मैं इसके प्यार में दीवाना हो चुका हूँ.... यह एक ऐसी लड़की है मेरी ज़िन्दगी में जिसको मेरी पर्सनिल्टी से कभी कोई काम्प्लेक्स नहीं होता...  मेरी पिछली सारी गर्ल फ्रेंड्स मुझे छोड़ के भाग गयीं.... काम्प्लेक्स में.... पर यह हमेशा मेरे साथ रही है.... आजकल इसने संन्यास ले लिया है...देखिये इसको ज़रा... 

इसके प्यार में मैंने भी संन्यास ले लिया है.... 

हम दोनों अब बाबा समीरानंद जी के आश्रम में धूनी रमाते हैं... 


मैं उन् लोगों का भी शुक्रगुज़ार हूँ.... जो मुझे गन्दी टिप्पणियां लिखने के लिए मजबूर करते हैं.... (शोर्ट टेम्पर्ड जो ठहरा..) उनकी अपेक्षित प्रतिक्रिया से मेरी कार्य उर्जा में बढ़ोतरी होती है. और मेरे शुभचिंतक मेरी कथित खराब टिप्पणियों को पढने के बावजूद भी मुझे समझते हुए स्नेह कि बारिश करते हैं.. मेरे साथ प्रॉब्लम सिर्फ यही है कि अगर कोई मुझे बिना मतलब में खराब बोलता है.... तो उसको मेरा खराब वाला रूप ही  देखना पड़ेगा.... मेरा एक उसूल है आप मुझे झापड़ मारोगे तो मैं गोली मारने में विश्वास रखता हूँ.... आप मुझे एक गाली दोगे तो सौ सुनेंगे.... मैं अपने दोस्तों कि बेईज्ज़ती कभी नहीं बर्दाश्त कर सकता ...चाहे वो रियल वर्ल्ड के हों  या फिर वर्चुअल के...


अंत में आप सबका फिर से आभार, बड़ों को प्रणाम.. व छोटों को ढेर सारा प्यार. रामप्यारी... आई लव यू. 


(लिंक यहाँ जानबूझ कर नहीं दिया है, क्यूंकि सब एक-दूसरे को जानते हैं..)

82 टिप्पणियाँ:

Arvind Mishra ने कहा…

बधाई ! वाह क्या धाँसू टीम है आपकी महफूज भाई (मी इन्क्लूडेड आफ कोर्स ) -हिप हिप हुर्रे!

खुशदीप सहगल ने कहा…

महफूज़ प्यारे,
आज तो हिंदी ब्लॉगिंग का हूज़ हू ही लिख डाला...और अब बाबा ललितानंद जी को चिंता करने की ज़रूरत नहीं...श्री समीरानंद आश्रम में अब घोड़े, तमंचे, रामपुरी की भी ज़रूरत नहीं...स्वामी महफूज़ानंद की सवारी पहुंच गई
हैं...हॉलेट इतने हैं कि वजह बाद में पूछते हैं...हाथ-पैर पहले चलाते हैं...पिछले जन्म से ही समझाता आ रहा हूं...शायद अब बाबाओं की सोहबत में कुछ सुधर जाए...वैसे कहा ये भी जाता है कि अच्छा भला शरीफ आदमी
जेल में पहुंच जाए तो उस्तादों की सोहबत में महारथी होकर बाहर निकलता है...

जय हिंद...

sanjay vyas ने कहा…

छोटे भाइयों की लिस्ट में नाम देखकर ख़ुशी हुई.ठीक ही है सिर्फ उम्र में ही कुछ साल बड़ा हूँ:)
ऐसे ही प्यार बांटते रहो.
मज़ा आ गया ,आज अपना परिवार बहुत बड़ा पा रहा हूँ.

Udan Tashtari ने कहा…

भई वाह!! अब सन्यास ले रहे हो जानकर बड़ी प्रसन्न्ता होती मगर रामप्यारी के कारण??? हा हा!!


ऐसे ही प्यार मुहब्बत से लिखते रहो, बहुत शुभकामना!!

M VERMA ने कहा…

किसी को भी श्रेय दो पर यह अपनी ही प्रतिभा है जो व्यक्ति को आगे ले जाती है.

M VERMA ने कहा…

प्रकाशन के लिये बधाई

परमजीत बाली ने कहा…

महफूज जी, हमेशा इसी तरह लिखते रहे....आप को .प्रकाशन के लिए बहुत बहुत बधाई।

Vivek Rastogi ने कहा…

इत्ती बड़ी ब्लॉगर फ़ैमिली देखकर बहुत खुशी मिलती है, महफ़ूज भाई ये तो आपका प्यार और अपनापन है ।

अल्पना वर्मा ने कहा…

रामप्यारी !!!!!!
ye yahan bhi??

'अदा' ने कहा…

चलिए कहीं तो बात बनी आपकी ...शायद ये ३०१ नंबर शुभ है आपके लिए ...अब रामप्यारी जैसी प्रतिभा उन ३०० बेचारियों में कहाँ होगी भला.....ये तो समीर जी और ताऊ जी की छात्र छाया में पली-बढ़ी हैं...इनकी बात ही अलग है....आपकी जोड़ी सलामत रहे....
ब्लॉग परिवार से मिलवाने के लिए आभारी हूँ...
चलते चलते इतना कहूँगी....जहाँ तक हो सके विवादों से दूर रहिये...हो सके लम्बी टिपण्णी देने से बचिए....जब भी गुस्सा आये ...लैपटॉप छोड़ कर घूमने निकल जाइए.....ब्लॉग्गिंग से ज़रूरी और भी कई काम हैं....
इसे आप मेरी धमकी भी समझ सकते हैं....
अब कोई पंगा नहीं ...बस....

Mithilesh dubey ने कहा…

महफूज भाई सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई एक और शानदार उपलब्द्धि के लिए । मेरा प्यार तो हमेशा ही आपके सात रहेगा , मुझे भी बेचैनी होती है जब कभी भी आपसे बात नहीं हो पाती । पिछले जनम का तो पता नहीं हाँ इस जनम में आप जैसा मुझे एक बड़ा भाई मिला जो हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता है और इसके लिए आपको आभार व्यक्त नहीं करुंगा क्योंकि आप बड़े भाई ये तो आपका धर्म है । और ये क्या अरे बस भी कीजिए अब भाभी को लाईये और गर्लफ्रेंड हमारे लिए छोड़ दीजिए नहीं तो अच्छा नहीं होगा , छोटे भाई की भी चिन्ता है कि नहीं ।

Suman ने कहा…

nice

अबयज़ ख़ान ने कहा…

बहुत खूब महफ़ूज़ जी.. बढ़िया है...

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

वाह भैया ,
फ़ौज खड़ी कर दी आपने ..
'' अमर उजाला '' वाली बधाई ..
'' सन्यास '' के बारे में सोचिये भी नहीं ..
'' भोग की तपस्या '' कीजिये .. यही सन्यास है ,,,,,,

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

लगता है समीरानन्द जी ने आपको भी अपने जाल में फाँस ही लिया....अरे भाई ये तो खेलने खाने की उम्र है और आप इस उम्र मे सन्यास ले बैठे :)
खैर जैसी आपकी इच्छा....राम भली करे! बस यूँ ही हँसते मुस्कुराते रहिए
और ........मजे करिए :)

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बहुत बधाई !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ!

rashmi ravija ने कहा…

बडा अच्छा लगा जान, आपके उर्जा स्त्रोत इतने सारे हैं....तभी, कभी कभी ज्यादा ही उर्जा इकट्ठी हो जाती है और आप बिना सोचे समझे कहीं भी खर्च कर डालते हैं :)( jst joking )
अच्छे मित्र और बड़ी बहन का काम ही होता है....डांट डपट कर सही राह पर लाना...ऐसे ही सृजनात्मक लेखन करते रहें...शुभकामनाएं

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

बहुत बहुत बधाई महफूज भाई, शायद आपके ब्‍लाग पर मेरा यह पहला कमेंट है इसके बावजूद हमें भी अपने छोटे भाईयों की लिस्‍ट में शुमार कर लीजिएगा. वैसे हम साधिकार शामिल है. :)

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

खुशदीप भतिजे ने सही कहा है कि "अच्छा भला शरीफ आदमी जेल में पहुंच जाए तो उस्तादों की सोहबत में महारथी होकर बाहर निकलता है..."

अब बाबा समीरानंद आश्रम में स्वामी महफ़ूजानंद बन के आ ही गये हो तो वहां तो एक से बढकर एक बाबा महाबाबा हैं. अब आपके गुरुघंटाल बनके निकलने मे कोई संदेह ही नही है.:)

रामराम.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

भाई आपका संस्कार के बारे में बेहतरीन जानकारी थी और निश्चित रूप से यह ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को पढ़ना और समझना चाहिए और यह प्रयास सफल भी हुआ आपको बहुत बहुत बधाई...और आपका यह छोटा भाई भगवान से यही दुआ करता की दिन प्रति दिन आपकी रचनाएँ सफलता के शिखर को चूमे...

राजीव तनेजा ने कहा…

लेख के छपने पर आपको बहुत-बहुत...बहुतायत में बधाई...

मित्रों की लिस्ट में अपना नाम देख कर खुशी हुई...

बी एस पाबला ने कहा…

अरे! ये पोस्ट है या पोल खोल :-)

बी एस पाबला

राज भाटिय़ा ने कहा…

चलिये आप को ओर राम प्यारी को बहुत बहुत बधाई, ताऊ को भी काफ़ी समय से फ़िक्र थी राम प्यारी की

ललित शर्मा ने कहा…

ईश्क मे जोगी बनते सुना था अभी देख भी लिया, चलो ठीक है ईश्क मिजाजी से ईश्क हकीकी की ओर चले, वाह भई दीक्षा समारोह मे पुरा ब्लाग परिवार ही आया हुआ है। आज तो आनंद आ गया। बधाई

चंदन कुमार झा ने कहा…

इसी तरह आप सफ़लता के शिखर पर चढ़ते रहे भैया । शुभकामनाओं के साथ ।

Dipak 'Mashal' ने कहा…

bahut bahut badhai..
bade bhai..
Jai Hind...

Rekhaa Prahalad ने कहा…

बहुत बहुत बधाई !

हास्यफुहार ने कहा…

रचना अच्छी लगी।

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

लेख तो छपना ही था... ऐसे बहुत से लेख छपे होंगे आपके, छपेंगे अभी भईया !
ये तो बस बहाना मिल गया अपनी सेना का अनावरण करने का । मैं भी हूँ न इसमें! खुश हूँ ।

वर्मा जी के शब्द मैं भी दोहराना चाहता हूँ, पूरी आत्मीयता से -
"किसी को भी श्रेय दो पर यह अपनी ही प्रतिभा है "

मनोज कुमार ने कहा…

आलेख पढ़ा। अच्छा लगा।

वाणी गीत ने कहा…

बहुत मुबारक ...अगर अच्छा लिखोगे तो सराहना मिलेगी ही ...
और बुरा लिखोगे तो प्रतिक्रिया बुरी ही तो मिलेंगी न छुटके भैया ...
इसलिए हमेशा अच्छा अच्छा लिखो ...
बुरा लिखने का मन हो तो लिखो जरुर ...कही भी कागज पर लैपटॉप पर ....बस उसे प्रकाशित मत करो ....गुस्सा उतर जाने पर पढोगे तो खुद को ही लगेगा कि नाहक ही ये उल्टा पुल्टा लिखा ...

बहुत खुश रहो ...और अपने आस पास सबको खुश रखो ....!!

pragya pandey ने कहा…

महफूज़ भाई आपका ब्लॉग देखा .. आपने इतना प्यार परोसा है की हम तो दंग ही रह गए .. आपके इतने हमदर्द हैं आपके अनगिनत छोटे और बड़े भाई हैं आपकी बहने और आपकी जाने कितनी गर्ल फ्रेंड्स और आपकी ख़ास रामप्यारी .. आप तो वसुधैव कुटुम्बकम को जीवन मेंचारितार्थ कर रहें हैं .. सच में आज की स्वार्थी और सूखी दुनिया में इतना प्यार और भावना पूर्ण अधिकारों के साथ बात करते जाना गंगा की औषधियुक्त निर्मल असंख्य कल कल बहती पवित्र धारा की याद बरबस ही दिला रहा है.. .. किस तरह आपको अपना उदगार संप्रेषित करें !!ऐसा करिए अपना फोन नंबर हमारे पास भेज दीजिये .

गिरिजेश राव ने कहा…

अब तक छप्पन की तर्ज पर
"अब तक 104"

बाप रे! ब्लॉगरी की इनसाइक्लोपीडिया!!
छपने की बधाई क्या दूँ, छोटी बात होगी।

वैसे संयत हो टिपियाने और लिखने की बिन माँगे सलाह मैं भी दे देता हूँ।

हिन्दी ब्लॉगरी में 'शत घूर्णावर्त तरंग भंग उठते पहाड़' अभी कम ही रहना चाहिए।

जी.के. अवधिया ने कहा…

"मेरा लेख "जानना नहीं चाहेंगे आप संस्कार शब्द का गूढ़ रहस्य? एक ऐसा शब्द जो सिर्फ भारत में ही पाया जाता है... :- महफूज़" का प्रकाशन दिनांक १९/दिसंबर/२००९ को राष्ट्रीय हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' के सम्पादकीय पृष्ठ पर"

बहुत बहुत बधाई!

SHIVLOK ने कहा…

SANYASHII PREMII JII

SANYASHINII PREMIKA JII

AAP DONON KO BADHYIYAN

HEY SWAMII JII
HEY MAHFOOJANAND JII
YAA MAHFOOJ MAHAARAAJ
AAPSE EK VINAMRA NIVEDAN HAI

EK NATKHAT SII,BHOLII SII,
SIIDHII SII, SALONII SII,
KOII LADKII DHOONDH KAR SHAADII
KAR LO YAR,
MERE DESH HINDUSTAN PAR KRIPA KARO,
KARO HINDUSTAN PAR KRIPA MAHAARAAJ,
MAHFOOJ JAISE DAS BEES KEEMATII
HEERE DE DO MERE DESH KO,

KOII BAAT NAHIIN MAHAARAAJ,
DAS BEES NA SAHII,
EK DO HII dedo,
HEY MAHFOOJANAND MAHARAJ
AKAD KO MARO GOLII
KARO AHSAAN THODA SA DESH PAR BHII,
SAKHT JAROORAT HAI DESH KO AAP JAISON KII,
MAT BANO NIRDAYII MAHAARAAJ

MUJHE TO KAR DENA MAAF IS TIPPANII
KE LIYE

KUCHH MOOD BANAOO JISASE HO BHARAT KA BHALAA

SHIV RATAN GUPTA
09414783323

aUR HAAN EK BAAT AUR
MERA NAAM SHIV RATAN GUPTA HAI
SHIVLOK MERE BLOG KA NAAM HAI
LOKESH MERE DOST KA NAAM HAI

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

महफूज भाई, आज तो आपकी "शुक्रिया और धन्यवाद " वाली झोली पूरी खाली हो गई होगी ?

रही मेरी तरफ से बधाई देने की बात तो वह मैंने पावला जी की पोस्ट पर ही दे दी थी " मेरी तो बधाई वाली झोली अभी भी पूरी भरी हुई है :)

अजय कुमार झा ने कहा…

अमां महफ़ूज़ मियां,यार अब भी ये बताने /जताने की ....भैय्ये हम तो कह रहे हैं कि बस आप महफ़ूज़ रहो सब महफ़ूज़ रहेंगे और लेखनी का यूं ही करो यूज़ ताकि उडते रहें सबके फ़्यूज़ ....यही है आज की सबसे ताजी न्यूज़ ...और यही थे इस पोस्ट पर हमारे व्यूज़ ...।

अजय कुमार झा ने कहा…

अरे हां एक बात तो कहना भूल ही गया इस पोस्ट की एक प्रति अपने होने वाले ससुरालियों को भिजवा देना ...क्योंकि उन्हें भी तो पता चले कि बारात के साथ साथ एक ब्लोग्गर्स मीट का इंतजाम करना है ....ठीक है न

Suresh Chiplunkar ने कहा…

गर्ल फ़्रेण्ड से मिलवाने का शुक्रिया… :) ऐसी फ़्रेण्ड के चलते सन्यासी न बनते तो आश्चर्य होता… :)

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…

भाई अब आप जाने मैं तो इस मामले में सन्यासिन से
बात चीत करके बताता हूँ

"Aks" ने कहा…

वाह महफूज भाई !!! अच्छी मंडली है !!! और आपका लेख न्यूज़ पेपर में देखा कर अच्छा लगा!!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

अरररररररे, किसी का नाम छोड भी देते महफूज भाई।


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जल में रह कर भी बेचारा प्यासा सा रह जाता है।
जिसपर हमको है नाज़, उसका जन्मदिवस है आज।

*KHUSHI* ने कहा…

wah... badhai ho...!!!

वन्दना ने कहा…

mahfooz

sabse pahle to tumhare lekh ke chapne ke liye hardik badhayi..........tum isi prakar nit naye aayam chute raho........bas apne gusse par control kar lo varna rampyari aur main dono milkar tumhare kan umethenge shayad tab samajh aayegi..........isliye ab gussa control aur rampyari se prem ki peenge badhao chahe sanyasi bano chahe grahasthi.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

महफूज़ भाई , बहुत बहुत बधाई।
संस्कारों पर आपका लेख तो काबिले तारीफ ही है।
साथ ही आपने पूरे ब्लॉग जगत को सूचीबद्ध कर दिया।
ब्लॉग जगत को एक परिवार के रूप में हमने भी देखा है।
मुझे भी यही लगता था की तक़रीबन १०० के आस पास सक्रिय ब्लोगर्स हैं , जो नियमित रूप से लिख रहे हैं।

पर लगता है ,बचपन में माँ ने बहुत डरा दिया ये कहकर --चुप हो जा वर्ना डॉक्टर सूई लगा देगा।
इस सूई के चक्कर में बच्चे डॉक्टर से भी डरने लग जाते हैं।
पर आप तो अब बड़े हो गए हैं , है ना।

शबनम खान ने कहा…

आपकी इस उपलब्धि पर ढेरों बधाई...मुझे याद रखने का शुक्रिया....

seema gupta ने कहा…

बहुत बहुत बधाई..

regards

ρяєєтι ने कहा…

waah bro... ese hi aage badhte raho...God Bless U...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

इस सन्यासिन को मेरा आशीर्वाद.......और तुम इसी तरह निखरते रहो

singhsdm ने कहा…

ब्लोगर फैमिली बनाने का शानदार प्रयास आपका वाकई बधाई के पात्र हैं आप ...................अमर उजाला में प्रकाशन की बधाई. आपका बड़प्पन है जो आपने सबको साथ में ले लिया वर्ना...आप खुद ही इतने समर्थ हैं कि आपको किसी की ज़रुरत नहीं...बहरहाल रिश्ते निभाना कोई आपसे सीखे.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

महफूज़ भाई ...... सबसे पहले बधाई और फिर आभार, शुक्रिया अपने दोस्तों की लंबी लिस्ट में हमको भी शामिल करने का ........ ये आपका प्यार है जो सबको खींच लाता है आपकी तरफ ...........

sada ने कहा…

बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनायें, इतने स्‍नेह के साथ आपने सबको अपने साथ जोड़कर रखा हुआ है किसी को अंजाने में भी नहीं छोड़ा यही आपकी सहृदयता है, भविष्‍य में भी उन्‍नति के पथ पर अग्रसर रहें ।

उम्दा सोच ने कहा…

आप का निराला अंदाज़ देख ह्रदय गद गद हो उठा !

आप को हमारी तरफ से शुभतम कामनाए !

आप की माशूका भी अति निराली लगीं ,परिचय करने का आभार !

shikha varshney ने कहा…

सबसे पहले रचना के प्रकाशन की बहुत बहुत बधाई...ये लेख था ही इतना अच्छा की इसे नहीं प्रकाशित करते तो बहुत नुकसान होता जनता का :) ......और आपकी ये पोस्ट तो ब्लॉग ख़ानदान की पोल खोल है बिलकुल ह अह आहा ह अह अह.....very nice keep it up.

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत बहुत बधाई और आशीर्वाद्

सलीम ख़ान ने कहा…

आप का निराला अंदाज़ देख ह्रदय गद गद हो उठा

अर्चना तिवारी ने कहा…

ब्लॉग पर आने का बहुत-बहुत शुक्रिया...इतनी तरक्की के लिए बधाई...आप तो छा गए ब्लॉग पर

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

वाह वाह सब परिवारियो को एक जगह देख कर खुशी हुइ . सन्यासी नही शादी करो तब सब परिवारी आयेन्गे नाचने . वैसे रामप्यारी भी हम लोगो को बहू के रुप मे स्वीकार है {क्या करे दिल का मामला है जवान लड्के की जिद सर माथे }

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

Ram Pyari is so cute ...God bless her
&
Your writing sederves accolades ..
It is hearening to read a long list of all your well wishers & Friends
who have turned into ' Family ' ...
Wonderful , heartfelt post Mehfooz bete ..........keep writing .

PEACE !

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... बधाईंया .... सिलसिला जारी रहे !!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

महफूज़ जी देखिएगा इस संयासन के भेष का कोई राज़ न हो .....हा...हा...हा...खूब जँच रहे हैं इस भेष में .....!!

Anamika ने कहा…

blog parivar se mil kar bahut gyan vardhan hua iske liye bahut bahut shukriya. rampyari bahut pyari hai.
aur mehfooz ji kuchh aalochna karna to panga lena hai coz aapni pehle hi dhamki de di hai..ki aap goli maarne me vishwas rakhte hai (ha.ha.ha) to bhaiya apun to dar gaye..

just kidding.

so nice to share this.

अर्कजेश ने कहा…

बधाई हो मित्र, आपको जो खुशी मिली उसकी ।
और शुभकामनाऍं भी ।

काफी कम समय में आपने ब्‍लागिंग की अपनी शैली बना ली । महफूज शैली ।

गर्ल फ्रेंड आपकी बहुत पसंद आयी । एक बार और मुबारक ।

सुलभ सतरंगी ने कहा…

प्रिंट प्रकाशन के लिए बधाई!!
भाई ऐसे मत लिखा करो
मैं भी जोगी बन जाऊँगा...!

ज्योति सिंह ने कहा…

aapki mandli aapki girl friend sabhi kamaal ke hai ,aap itni kam umra me sanyaasi ho gaye iske liye afsos hai ,pyaar me kabhi kabhi aesa ho jata hai ,bhari jawani me aadmi budha ban jaata hai ,raha gardisho me hardam mere ishk ka sitara ....shaandar aur mazedar

संजय भास्कर ने कहा…

महफूज जी, हमेशा इसी तरह लिखते रहे....आप को .प्रकाशन के लिए बहुत बहुत बधाई।

संजय भास्कर ने कहा…

इसी तरह आप सफ़लता के शिखर पर चढ़ते रहे भैया । शुभकामनाओं के साथ ।

Dr. kavita 'kiran' (poetess) ने कहा…

khuda mujhko itni khudai na de
ki अपने सिवा कुछ दिखाई न de.
wah mahfooz sahab! aapne apne siwa aaj sabko dekha.kya khoob.
WISH U A VERY HAPPY NEW YEAR

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत बहुत बधाई जी लिखते रहे आप यूँ ही निरंतर और यह परिवार यूँ ही बढ़ता रहे :)

Editorial team, JANOKTI ने कहा…

mahfooj bhai ko haardik badhai ! aap nirantar likhte rhen .

sahi mayne mein ek aadarsh hindustani kee soch aapki lekhani mein jhalakti hai .

tulsibhai ने कहा…

" bahut hi acchi post mahfooz..."

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

tulsibhai ने कहा…

" shandar post ...aapko badhai " दिनांक १९/दिसंबर/२००९ को राष्ट्रीय हिंदी दैनिक 'अमर उजाला' के सम्पादकीय पृष्ठ " ke liye

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Richa Dwivedi ने कहा…

pichle aadhe ghunte se apna nam in teen sau namo me dhoondh rahe hain aur bar bar dekhne per bhee dikh nahi raha hai.. aur to aur wo rampyari tak ka nam hai.. gggrrrrr bhai.. ab hum ghar aakar jab kanpati per pistol rakh kar likhwayenge tab pata lagega ki kitna pyar karte hain hum aur aapko kitna abhari hona chhaiye mera.. aa hi rahe hain bas..

गौतम राजरिशी ने कहा…

लेखनी जब सर चढ़ के बोले तो उसका जादू फैलना ही है।

बहुत-बहुत बधाई हो!

कल रात गये हिचकियाँ तो नहीं हो रही थी आपको?

आपकी जीवटता को सलाम!

ओम आर्य ने कहा…

Saath hin main aabhari hoon us parmatma ka,jo mujhmen saanse liya karta hai....

लता 'हया' ने कहा…

शुक्रिया महफूज़ साहब ,
आपने तमाम bloggers के साथ अपने रिश्तों को जिस ख़ूबसूरती से बेतक़ल्लुफ़ अंदाज़ में पेश किया है वो क़ाबिले -तारीफ़ है ,ख़ुदा आपके इस ख़ानदान में और इज़ाफ़ा करे और आपके लिए सबकी मुहब्बतें यूँ ही बनीं रहे ....हमेशा ,हमेशा ....................................

महाशक्ति ने कहा…

आपका यह लेख हमने ब्‍लाग और समाचार पत्र दोनो में पढ़ा था, बहुत बहुत बधाई।

हमे स्‍नेह दिया उनके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद, थोड़ा पोस्‍ट तक पहुँचने मे देर हो गई।

शोभना चौरे ने कहा…

aap aise hi likhte rhe .sb jgh dikhte rhe inhi shubhkamnao ke sath badhai

Priya ने कहा…

Aha.....aapke baas to comments ka jawabada hai...pahles socha na likhu....bheed mein kho jayenge....fir socha aaye hai to kuch likh ke hi jaaye......aapki Raampyaari to hamko bhi bahut pasand aayi ....aur sabko shukriya aur yaad rakhne ka tareek bhi

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

बहुत बधाई अमर उजाला में लेख छपने की । ऐसे ही लिखें और खूब लिखें आपकी लेखनी परवान चढे ।

प्रबल प्रताप सिंह् ने कहा…

बड़ी फुलटास टीम बनाई है भाईjaan, शुक्रिया मुझे १२ खिलाडी बनाने के लिए.

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