गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

जाने क्या क्या तलाश करता हूँ,
जब भी बाज़ार से गुज़रता हूँ ,


मैं कोई पीर नहीं
आदमी हूँ , गुनाह करता हूँ।


लोग डरते हैं मौत से
'महफूज़ ' मैं ज़िन्दगी से डरता हूँ॥



महफूज़ अली

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

My page Visitors