रविवार, 27 सितंबर 2009

हम इतिहास सिर्फ इसीलिए पढ़ते हैं क्यूंकि....... कल के सवाल का जवाब....



हम इतिहास (History) क्यूँ पढ़ते हैं? सवाल था तो सीधा ...... लेकिन साथ ही साथ टेढा भी.  अब आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने यह सीधा और सरल सवाल क्यूँ किया? वैसे यह सवाल करने का एक मकसद था. क्यूंकि हमारी ज़िन्दगी हमेशा पास्ट यानी की भूतकाल  से जुडी होती है और हम कहते भी हैं कि छोडो वो पिछली बातें थीं क्या उनको याद करना..... जो बीत गया उसे भूल जाओ... 


पर जो बीत  जाता है... न तो उसे हम भूल पाते हैं और न ही उनको याद करना छोड़ पाते हैं. हम अपनी निजी ज़िन्दगी में जब भी कोई बात करते हैं तो पिछले बातों को भी याद करते हैं. और पीछे जो गलतियाँ हुई हैं उनसे सबक लेते हुए अपने आने वाले नए भविष्य का निर्माण करते हैं.  यानी कि मतलब यह है कि भविष्य कि नींव भूतकाल में ही तय हो जाती है.  


वैसे हम इतिहास क्यूँ पढ़ते  हैं? इतिहास पढने के कई महत्वपूर्ण तर्क हैं और इन तर्कों को हम नकार भी नहीं सकते.  कई तर्क यह कहते हैं कि: -------


  • इतिहास हमें हमारी दुनिया कि उत्पत्ति को जानने में मदद करता है.
  • इतिहास  जानने से हम तर्कों को और प्रमाणिक कर देते हैं.
  • इतिहास हमारे चिंतन को मजबूती प्रदान करता है.
  • इतिहास हमें हमारे वर्तमान और भूतकाल को समझने में मदद करता है .
  • इतिहास में घटनाओं और लोगों के बारे में पढना अच्छा लगता है.
  • इतिहास हमें बाकी विषयों को समझने में मदद करता है.
  • इतिहास हमें आधुनिक राजनितिक और सामाजिक समस्याओं को समझने में मदद करता है.
  • इतिहास हमें यह भी जानने में मदद करता है कि भूतकाल में लोग सिर्फ अच्छे या बुरे ही नहीं थे,  बल्कि जटिल परिस्थितिओं में किस प्रकार व्यवहार करते थे.


ऐसे कई तर्क हैं जिनको हम कह सकते हैं कि जानने व समझने के लिए हम इतिहास पढ़ते हैं. वैसे यह कहना कि भूतकाल में जो गलतियाँ हो चुकी हैं उन्हें भविष्य में न दोहराया जाये इसलिए हम इतिहास पढ़ते हैं कहना काफी हद  तक सही नहीं है....  क्यूंकि यह तो है ही कि हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेते हैं..... और उन्ही सबक के आधार पर भविष्य का निर्माण करते हैं..... और फिर भी वही गलतियाँ दोहराते हैं जो भूतकाल में हो चुकी हैं.. फिर इतिहास पढने का फायदा क्या है? जब हम बार बार वही गलतियाँ दोहराते हैं. इतिहास में हम युद्ध , न्याय-अन्याय , गरीबी, भुखमरी , सम्पन्नता इत्यादि के बारे में जानते हैं , पढ़ते हैं. फिर भी हम उनसे कोई सबक नहीं लेते हैं. और आज भी वही गलतियाँ दोहरा रहे हैं. फिर इतिहास पढने से क्या फायदा,  जब हमें गलतियाँ दोहरानी ही है? 


पर हमारे लिए इतिहास जानना बहुत ही ज़रूरी है. हमें आखिर मालूम तो होना चाहिए न, कि हम पहले क्या थे और आज क्या हैं? 
अब यह कहना कि इतिहास खुद को दोहराता है , यह कहने के लिए तो सही  है पर कभी हमने यह नहीं सोचा कि इतिहास खुद को दोहराता ही क्यूँ हैं? इसका जवाब बहुत ही आसान है क्यूंकि हमने अपने भूतकाल से कुछ सीखा ही नहीं ..... इसलिए इतिहास ने खुद को दोहरा दिया... इतिहास भविष्य नहीं बताता ...इतिहास यह बताता है कि जो गलती वर्तमान में हुयी है, उसको ध्यान में रखते हुए अपने भविष्य का निर्माण करो.... नहीं करोगे ....तो इतिहास फिर और बार - बार दोहराया जायेगा... इसलिए हमें वर्तमान को सही करना या रखना ज़रूरी है तभी तो भविष्य सही होगा और यही इतिहास हमें सिखाता है. 


इतिहास एक प्रगति की प्रक्रिया है, जो बदली जाती हैं, संशोधित की जातीं हैं और कभी न भूलने के लिए लिखी जातीं हैं.  सुकरात (Socrates) ने कहा था की "Know thyself" मतलब खुद को जानिए . यहाँ पे सुकरात का मतलब खुद को जानना ही नहीं था..... उसका मतलब पूरे अद्भुत और प्रक्रितिविश्यक संसार को जानने से था.  और यही जानने को हम इतिहास कहते हैं.  यह खुद को जानने  व समझने की एक प्रक्रिया है. और इसी प्रक्रिया  को हम  आत्म-ज्ञान या स्व-सुधार की प्रक्रिया कहते हैं जो की इतिहास से ही हो कर गुज़रता है. यानी की इतिहास का मतलब है स्व - सुधार .....


वैसे दो शब्दों में आपको बता दूं की  हम इतिहास इसलिए पढ़ते हैं ताकि हम अपने संस्कार और संस्कृति को भूले नहीं.... उन्हें हम जानें......  और जानकर ..... भविष्य की पीढी को  विरासत में दें..... अपने संस्कार और संस्कृति को जानना ही इतिहास है. जो व्यक्ति अपने संस्कार, संस्कृति और इतिहास को नहीं जानता है वो सामाजिक रूप से बहिष्कृत (PARIAH) होता है. और  यही  गलती आजकल हम कर रहे हैं.... की हम अपने संस्कार और संस्कृति को भूल रहे हैं और इतिहास जैसे विषय का मज़ाक उड़ा रहे हैं. जिसने इतिहास नहीं जाना उसने खुद को नहीं जाना.  अपनी धरोहरों को संभाल कर रखना ही इतिहास है. स्व- ज्ञान ही  इतिहास है.


सारांश यही है कि हम इतिहास इसलिए पढ़ते हैं जिससे कि हम भूल सुधार करते हुए अपनी संस्कृति और संस्कार को भूले नहीं...




======================
दोस्तों, इतिहास मज़ाक का विषय नहीं है..... न ही यह कोई बोर करने वाला विषय है.. यह इसलिए हमारे syllabus में है कि हम जानें खुद को..... अपने संस्कार को और अपने संस्कृति को.... वरना यह इतना प्रसिद्ध विषय कैसे होता.... ? क्यूँ इतिहास से CIVIL SERVICES EXAM को पास करने वाले को Genius कहा जाता है? क्यूँ एक Archaeologist को आदर कि निगाह से देखा जाता है? क्यूँ ARCHAEOLOGY DEPT. बनाये गए हैं? यह तो हर इंसान को जानना ही चाहिए.... तभी वो अपने धर्म और कर्म को भी जान पाएगा.... नहीं तो सिर्फ बिना मतलब कि बहस ही करता रहेगा......
-------------------------


काफी लोगों इस पोस्ट को देखा ...... और काफी लोगों ने इसका जवाब भी दिया.... और काफी लोग इस सवाल से बच के निकल भी गए.... अगर हम हिंदुस्तानिओं ने इतिहास विषय को स्कूल में सही तरीके से पढ़ा होता ..... तो इसका सही जवाब बहुत आसान था.... हम ज़ात, धर्म, प्रांत और भाषा को लेके सिर्फ इसीलिए झगड़ते हैं...... क्यूंकि हमने इतिहास नहीं पढ़ा है..... 


खैर..... मेरे सवाल का लगभग सही के करीब जवाब जिन लोगों ने दिया है.... उनके नाम इस प्रकार है......


  1. श्री. समीरलाल जीइतिहास समय दर्ज करता है तो हमारे भविष्य का मार्गदर्शक होता है.
  2. श्री. जैराम विपल्व : अतीत को जानकर-समझ कर और उससे सीख लेकर वर्तमान तथा भविष्य दोनों को बेहतर किया जा सकता है। 
  3. श्री. वर्माजी: भूत की नीव पर वर्तमान और भविष्य होता है.
    बिना भूत को जाने हम न तो वर्तमान और फिर न तो भविष्य को स्वरूप दे सकते है. जिस तरह अगर हम अपने मकान पर एक मंजिल और बनवाना चाहेंगे तो उसकी नीव को जाने बिना नही आगे बढ सकते है. 
  4. श्री. अवधिया जी : कहा जाता है कि 'इतिहास स्वयं को दुहराता है'।इतिहास पढ़ने से हमें इस बात का कुछ कुछ भान हो जाता है कि कौन सी बातें दुहराई जा सकती हैं, और हम स्वयं को उसके लिए मानसिक रूप से तैयार रखते हैं।
  5. शिखा वर्ष्णे जी : हम इतिहास इसलिए पड़ते हैं क्योंकि अतीत की जड़ों से ही भविष्य का पेड़ उपजता है ,उसकी गर्त से ही हमें अपने विकास का मार्ग मिलता है.
  6. चन्दन झा: हम अपने अतीत को याद रखते हुए एक सुःखद भविष्य की कल्पना कर सके । इतिहास हमें अपनी गलतियों से अवगत कराता है और सही मार्ग भी दिखलाता है.
  7. अदाजी : इतिहास हमें अपने अतीत से जोड़ता है और माप दंड देता है कि हमने उपलब्धियों और गलतियों से कितनी दूरी तय की है और कैसे की हैं...इतिहास हमें अपने अतीत से भागने नहीं देता है, हमें हर दिन उससे जोड़े रखता है .. 



(आप सब लोगों से निवेदन है कि अपने Addresses कृपया मेल कर दें ....)


और सीमा जी का बहुत बहुत धन्यवाद .....आपने सही अंदाजा लगाया था कि... ह्म्म्म बेहद सम्वेदनशील प्रश्न...लकिन हमे आपके जवाब का इंतजार है, आप ने ये प्रश्न ऐसे ही नहीं पुछा होगा....इसमें जरुर कोई न कोई तर्क होगा.....

50 टिप्पणियाँ:

dimple ने कहा…

m proud of u..gud luck..may god bless u..

Mithilesh dubey ने कहा…

महफूज भाई आपका बहुत-बहुत आभार इस महत्वपुर्ण जानकारी के लिए।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

Aapka pehala lekh o nahee padha par ye jawab padh kar andaja laga sakte hain. hume itihas padhane wale itihas ka mahtw theek senahee batapate. Iseese hum wahee galtiyan bar bar doharate rehate hain. is tarah itihas padhane wlon kee jimmewaree aur bhee badh jatee hai.

M VERMA ने कहा…

"हम इतिहास इसलिए पढ़ते हैं ताकि हम अपने संस्कार और संस्कृति को भूले नहीं.... उन्हें हम जानें...... और जानकर ..... भविष्य की पीढी को विरासत में दें..... अपने संस्कार और संस्कृति को जानना ही इतिहास है."
बहुत सही कहा है. इतिहास की नीव पर वर्तमान और भविष्य खडा होता है. इतिहास की अनेक भूले हम इसलिये दुहरा रहे है क्योकि हम इतिहास को सही सही नही जानते या उसे नकार देते है.

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा रहा सारांश जानना भी.

'अदा' ने कहा…

महफूज़ साहब,
ख़ुशी हुई मुझे कि मैं भी एक विजेता हूँ लेकिन उससे भी ज्यादा ख़ुशी होती है जब आप कि लेखनी को देखती हूँ कुछ सार्थक काम करते हुए..
यूँ तो हम सभी कुछ न कुछ लिखते ही रहते हैं लेकिन कितने हैं जो वास्तव में कुछ सन्देश देने के लिए लिखते हैं बहुत कम....मैं खुद भी ऐसा नहीं करती हूँ...लेकिन आप इनदिनों जो लिख रहे हैं वो अपने लिए कम दूसरों के लिए ज्यादा है ..हर पोस्ट कोई न कोई अहम् जानकारी लिए हुए होती है...
आपका ह्रदय से आभार व्यक्त करना चाहूंगी..
आप ऐसी ही अपनी लेखनी का ताब बनाये रखिये और अपना सन्देश लोगों तक पहुंचाते रहिये..
मेरी शुभकामना और प्रार्थना आपके साथ है....
मेरी कलम आप किसी ऐसे विद्यार्थी को दे दीजियेगा जिसे इसकी सही मायने में ज़रुरत होगी मैं समझूंगी मेरा पुरस्कार मिल गया...
धन्यवाद..

'अदा' ने कहा…

महफूज़ साहब,
ख़ुशी हुई मुझे कि मैं भी एक विजेता हूँ लेकिन उससे भी ज्यादा ख़ुशी होती है जब आप कि लेखनी को देखती हूँ कुछ सार्थक काम करते हुए..
यूँ तो हम सभी कुछ न कुछ लिखते ही रहते हैं लेकिन कितने हैं जो वास्तव में कुछ सन्देश देने के लिए लिखते हैं बहुत कम....मैं खुद भी ऐसा नहीं करती हूँ...लेकिन आप इनदिनों जो लिख रहे हैं वो अपने लिए कम दूसरों के लिए ज्यादा है ..हर पोस्ट कोई न कोई अहम् जानकारी लिए हुए होती है...
आपका ह्रदय से आभार व्यक्त करना चाहूंगी..
आप ऐसी ही अपनी लेखनी का ताब बनाये रखिये और अपना सन्देश लोगों तक पहुंचाते रहिये..
मेरी शुभकामना और प्रार्थना आपके साथ है....
मेरी कलम आप किसी ऐसे विद्यार्थी को दे दीजियेगा जिसे इसकी सही मायने में ज़रुरत होगी मैं समझूंगी मेरा पुरस्कार मिल गया...
धन्यवाद..

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

SAhi kiya bhai aapne ki aapne mujhko winner ghoshit nahi kiya....
...bhai bhatija vaad mujhe bhi pasand nahi !! aure waise bhi badi badi pratiyogitaaon main to ye clause hi hota hai ki "ismein rishteedar bhaag nahi le sakte"
:)

JOKES APART:
Hamesha ki tarah sargarbhit lekh...
aapko aDaDi sahi kehti hain intelluctual Blogger.
badi acchi "Brain Storming" karvai hai aapne sab bloggers ki....
And that followed by this great post !!

Trust me i've no words to say !!
Beside....
HAT'S OFF

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

टिप्पणियों का दान करने वाले सभी महानुभावों को बधाई।
महफूज जी।
आपका बहुत-बहुत आभार!

shikha varshney ने कहा…

mafooz saheb.bahut badhai aapko itna achcha vishay par jaankari dene ka ..itihaas mera manpasand vishay hai or isse judi har baat mujhe pasand hai.
han mujhe vijeta chunne ka bhi shukriya...mera ye puruskaar aap kisi jaruratmand bachche ko kabhi puruskaar swaroop de dena or ese hi subject par yahan charcha karte rehna .mujhe mera prize mil jayega ok......God bless you.

sadhana ने कहा…

अगर हम हिंदुस्तानिओं ने इतिहास विषय को स्कूल में सही तरीके से पढ़ा होता ..... तो इसका सही जवाब बहुत आसान था.... हम ज़ात, धर्म, प्रांत और भाषा को लेके सिर्फ इसीलिए झगड़ते हैं...... क्यूंकि हमने इतिहास नहीं पढ़ा है.....


ye aap bilkul sahi bole hai
par ye sirf hindustaniyo ka hi nahi hai ye puri duniya pe lagu hota hai ....

Nirmla Kapila ने कहा…

bahut mahatvpooran jaanakaaree hai dhanyavaad

अर्कजेश ने कहा…

पहले हिसाब लगाइये कि इतिहास से फायदा ज्यादा हुआ है कि नुकसान । बिना सोचे कहा जा सकता है कि नुकसान भारी है फायदे पर । एक तो जिसे हम इतिहास कहते हैं वह एक झूठ का पुलिँदा है । क्योंकि इतिहास राजनीति का शिकार है । आज भी अलग अलग धर्मों और जातियों के लोग हजारों साल से चली आ रही खुन्दक को लेकर सिर फोड़ रहे हैं । यह सब इतिहास की कृपा है । इतिहास अहंकार पाखंड और कुंठा के अलावा कुछ नहीं देता । राजनैतिक इतिहास हमेशा सत्ताधारियों द्वारा अपने हित में लिखवाया गया है । राजनीतिक और धार्मिक इतिहास को छोड़कर सिर्फ विग्यान कला और साहित्य का इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए । आताताइयोँ का इतिहास नहीं ।

अमृत पाल सिंह ने कहा…

ये तो गलत है। आपने तो अपना तर्क देकर सबको झुठला दिया। ये तो आपने अन्याय किया है। गलत बात महफ़ूज भाई।

Dipak 'Mashal' ने कहा…

Mahfooz bhai, ek achchhe lekh ke liye ekbar fir se badhai, kai jagah bahut hi satyata jhalakti hai lekin kahin kahin aapke vivechan se sahmat nahin hoon, jaise ki Sukrat ka kahna ki 'know thyself' ye philosophy ko simete hue hai aur jahan tak iska matlab wahi hai jo is dohe me kaha gaya hai ki 'kastoori kundali base mrag dhoonde van maahin.' haan aap isme ye vyakhya jod sakte hain ki iska ek meaning khud ko yani manav jati ko samajhne se hai kintu poori tarah se sahi hon aisa mujhe nahin lagta. aise hi khoobsurat lekh likhte rahiye. Gustakhi muaf karen. Aapka anuj- Dipak 'Mashal'

Babli ने कहा…

इस बढ़िया और महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! बहुत ही सुंदर पोस्ट!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

महफूज़ जी बहूत ज्ञान मिला आपकी इस पोस्ट से ...... बहूत से तथ्य साफ़ हो गए .......... बड़े बड़े ब्लोगेर्स का दृष्टिकोण भी समझने को मिला ........ बहूत ही अछे से संजोया है आपने इस पोस्ट को ........

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

बहुत अच्छा विश्लेषण

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

भाई महफूज जी,
मैं अर्कजेश जी के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ.
कृपया गौर करें.
सच को झूंट का पुलिन्दा बना कर इतिहास कहा जाये, तो ये इतिहास का अपमान है. बातें एक से दुसरे, फिर तीसरे को होती हुई क्रमश कहाँ से कहाँ पहुँच जाती है...कि कहने वाला उसे वापस सुन कर अपना सर पीट लेता है. यही हल इतिहास का हो गया, जो भी सत्ता में रहा, पैसे देकर, इमान खरीद कर इतिहास में रद्दोबदल कराया.

हम धार्मिक ग्रंथों कि सत्यता पर विज्ञानं के सहारे प्रश्न तो खड़े कर देते हैं, पर इतिहास पर नहीं, वस्तुतः जिसने देख, वह तो जीवित नहीं, पर किव्दंतिया गढ़ी जाती रही हैं अपनी-अपनी समझ से. जब हम आज के दौर में ही जो कुछ जैसा देख रहे हैं, उसे ही नकार कर तारीफ के पुलंदे गढे हुए देख रहे हैं तो आदिकाल से अब तक क्या हुआ होगा सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है, आपने अपने तर्कों से एक बहुत बड़ा विवाद खडा कर दिया है, कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता है.....कृपया इसे अन्यथा न लें..... तर्क कि आवश्यकता वाद-विवाद में होती है इसी आशय से ऐसा लिखा क्योंकि आपने अपनी बात कहने में तर्क दिए है....टिप्पणियों में भी बिरोध, और हज़म नहीं जैसी बातें यही तो परिलक्षित कर रही है.... खैर हमें क्या, विवाद से चटकारे ही तो लिए जाते रहे हैं, लिया जा रहा है और लिया जाता रहेगा, यही पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर है विवादों का.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

Shobhna Choudhary ने कहा…

aapke blog se kafi important knowledge milti hai.........

जी.के. अवधिया ने कहा…

मेरे विचार से इस पोस्ट की सबसे अच्छी पंक्तियाँ:

".... हम ज़ात, धर्म, प्रांत और भाषा को लेके सिर्फ इसीलिए झगड़ते हैं...... क्यूंकि हमने इतिहास नहीं पढ़ा है..... "

संजय भास्कर ने कहा…

"हम इतिहास इसलिए पढ़ते हैं ताकि हम अपने संस्कार और संस्कृति को भूले
इतिहास की नीव पर वर्तमान और भविष्य खडा होता है
अगर हम हिंदुस्तानिओं ने इतिहास विषय को स्कूल में सही तरीके से पढ़ा होता ..... तो इसका सही जवाब बहुत आसान था..

संजय भास्कर ने कहा…

Mahfooz bhai, ek achchhe lekh ke liye ekbar fir se badhai

ओम आर्य ने कहा…

MAHFOOJ BHAAI
BADHIYA HAI ITIHAS KI JAANKARI............

सर्वेश दुबे ने कहा…

Aap ke pryas se kafi logo ko sabk milega mujhe is bat se kafi khusi hai .lekin sath hi sat ek kam Aap mera bhi kar de to Log Aap ke Aabhai rahenge : 2 october ko ek kanun bana tha public place pe Dhrumpan pe rok lagai gayi thi leki Aaj bhi Delhi ki bus me sab se jyada Bidi ,Sigret pite hua kudh Bus Driver ko dekha ja sakta hai Ab is se jyada kya kahu .Sayad Aap ke pryas se kuchh fark Aaye .Mai bhi kosis karta hu rokne ke liye but on line(Matlab bus me ya train me )lekin mai sirf kuch logo ko rok pata hu .Bade paymane pe is per rok lagane ke liye sayad mera kad Abhi chhota hai So Aap se madad chaiye ------- Sarvesh dubey

रश्मि प्रभा... ने कहा…

kamaal ka prawah hai tumhari soch me....kuch anokha, vidwatapurn kar hi jate ho......gr8

अनिल कान्त : ने कहा…

इस पोस्ट से काफी कुछ जानने का मौका मिला....शुक्रिया

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत ही बढ़िया रही यह चर्चा । और विजेता के रूप में चयनित करने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।

SACCHAI ने कहा…

" HAMARE VIJETA bhai KO BADHAI HO "

" bahut hi rochak jankari mili hai .is jankari ke liye dhanywad "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

" " acche sawal ke liye mere bhai ,mahfooz tumhe bhi badhai "

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनायें
पोस्ट पढने दोबारा आउंगी.

वाणी गीत ने कहा…

महफूज भाई ,
बहुत अच्छा विषय लिया है तुमने .....प्रारंभिक वर्षों में विज्ञानं वर्ग से पढने के बावजूद भी इतिहास मेरा प्रिय विषय रहा है ...इतिहास विषय हैं अपने आपको जानने का ...पूर्व में की गयी गलतियों से बचते हुए सुनहरे भविष्य की रचना में इसका महतवपूर्ण योगदान है ...मगर आज के हालत देखते हुए मुझे नहीं लगता की हमने भविष्य से कुछ खास सबक लिया है ...
यहाँ अर्क्जेश के वक्तव्य से भी मैं कुछ हद तक सहमत हूँ ...लेखन में देश काल परिस्थिति के अलावा लेखक पर पड़ने वाले मानसिक अथवा राजशाही दबाव भी काफी मायने रखते हैं ..!!
तुम्हारे उर्वरक मस्तिष्क में ऐसे ही नए विचार फलते फूलते रहे ...बहुत शुभकामनायें ..!!

sada ने कहा…

इतिहास की छोटी से छोटी एवं महत्‍वपूर्ण जानकारियों को समेटे आपका जवाब एवं विजेता प्रतिभागियों के जवाब बेहद सराहनीय हैं, आभार के साथ-साथ यही कहना चाहूंगी कि आपकी सोच एवं लेखनी सार्थक हो अनेको शुभकामनाएं ।

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

Badhiya jaankari .ham itihas kyon padhate hai..abhar aapka...

seema gupta ने कहा…

भई वाह , हमारा अंदाजा सही ही था और उस पर इतने महत्वपूर्ण सार्थक यथार्त सटीक उत्तर की अपेक्षा भी थी आपसे, और आपने इस आलेख में जो भी जानकारी दी वो हमेशा यदा रखने और मन मस्तिष्क में सहेजने लायक है. आभार इस रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी को हम सब से बाँटने के लिये.

regards

Pankaj Mishra ने कहा…

सभी सही जवाब देने वालो को बधाई और हां आज हमें भी पता चल गया इतिहास क्यों पढ़ते है

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

इतिहास की महत्ता को सलीके से व्याख्यायित किया है।

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

आदरणीय महफूज अली साहब,
सर्वप्रथम इस बात के लिए आपसे क्षमा चाहूँगा कि मैं आपके द्वारा उठाये गए एक सवाल का उचित समय पर उत्तर न दे सका! इसकी वजह यह थी कि मैं ३-४ दिनों के लिए अपने बचपन के दोस्तों, "शुकून" और "शान्ति" को ढूँढने उनकी तलाश में बहुत दूर सड़क मार्ग से निकल गया था ! जिस जगह मैं गया था, वहाँ न तो इन्टरनेट थी और न ही फ़ोन !

आपने निशंदेह एक अच्छा सवाल उठाया था, मगर मैं आपकी इस बात से पूर्ण सहमत नहीं हूँ कि "९९% लोग यह नहीं जानते कि वे इतिहास पढ़ते क्यों है" ? मैं आपके इस तर्क को दूसरे ढंग से कहूंगा कि हमारे देश में ९९ % लोग इतिहास पढ़ते ही नहीं! अगर उन्होंने ज़रा भी इमानदारी से इतिहास पढा होता , तो यह देश तीन-तीन गुलामियाँ क्यों झेलता ? मेरा यह मानना है कि इतिहास उस एक बड़े खतरे के चिन्ह के सामान है, जो भूतकाल को आधार मानकर, भविष्य में होने वाली घटना के प्रति हमें वर्तमान में आगाह करता है ! जो यह दर्शाता है कि हमारे पूर्वजो ने भूतकाल में क्या-क्या गलतियां की ! अब अगर हम जान बूझकर उस खतरे के निशाँ को अनदेखा कर दे, तो गलती किसकी है? और य्ही सदियों से इस देश में होता आ रहा है कि शिक्षाविदो ने तो मोटी - मोटी इतिहास की किताबे पाठ्यकर्म में लगा दी, मगर इमानदारी से उसे 1% लोगो ने भी नहीं पढ़ा ! वो इतिहास की किताबे भी एक तरह से हमारे इस चिटठा जगत की भांति है, जहां पर कुछ लोग टिपण्णी तो कर देते है मगर लेख अथवा रचना को इमानदारी से बहुत कम लोग ही पढ़ते है! अतः अगर आपका प्रश्न इस प्रकार होता कि हम लोग इमानदारी से क्यों इतिहास नहीं पढ़ना चाहते तो शायद आज के सन्दर्भ में अधिक उचित होता !
हाँ आपने मेरा इ-मेल पता माँगा था, तो मेरा इ-मेल है,pcgulaniathotmail.com

Pappu Yadav ने कहा…

महफूज़ जी,
आपकी हर पोस्ट बहुत ही ज्ञानवर्धक होती है, यह भी लगता है आपने वास्तव में पोस्ट को काफी खोज बीन के बाद लिखा है. बहुत ख़ुशी होती है पढ़ कर, अपनी कृतज्ञता ज्ञापन करना चाहता हूँ.
आपको बहुत बहुत बधाई

Pappu Yadav ने कहा…

महफूज़ जी,
आपकी हर पोस्ट बहुत ही ज्ञानवर्धक होती है, यह भी लगता है आपने वास्तव में पोस्ट को काफी खोज बीन के बाद लिखा है. बहुत ख़ुशी होती है पढ़ कर, अपनी कृतज्ञता ज्ञापन करना चाहता हूँ.
आपको बहुत बहुत बधाई

"लोकेन्द्र" ने कहा…

बिल्ल्कुल भय्या मै भी आपकी बात से सहमत हूँ.....
आपकी ही कही बातों को मै कुछ इस तरह कहूँगा....
की इतिहास का अध्ययन हमें अपने जड़ों का ज्ञान कराती हैं और अपनी जड़ों से बंधे रहने को प्रेरित भी करती है....... और इसका तो समय भी गवाह है की अगर सकारात्मकता के साथ अपनी जड़ों के साथ बंधा है तो अक्सर तुफानो को झेलकर भी वो निडर खडा दिखता है.....

Apoorv ने कहा…

Very nice Mahfooz bhai..aap ne to Toynbee sahab ko competition de diya..Itihas ko bhavishya se jodna aur behtar banana hi Vartaman ki jimmedaari hoti hai..History mera bhi behad pasandida subject hai..wavelength milti hai hamari..magar kayee questions ka javab nahi milta..

Apoorv ने कहा…

..thnx for remembering me..bus jara out of town tha..vaise ekdum fine hun..bus thoda masroofiyat hai abhi..so jyada waqt nahi mil pa raha idhar..shukriya.

shabnam khan ने कहा…

Mehfooz ji...yaha par sahi galat wali to koi baat hi nahi ha...jo tark aapne diye apki nazar me vhi thik ha par mera jawab in paramparagat jawabo se zra hatke tha...lekin kehte ha n Nayapan har kisi ko pasand nahi ata...chaliye koi baat nahi...akhir apka blog ha apke lekh ha aur aapki abhivyakti...fir bhi apka shukriya ki aapne hame ye mauka diya...

shabnam khan ने कहा…

Mehfooz ji...apka jawab pda...jawab to sare hi logo ne sahi diye the..khair...apna apna nazariya ha...apka blog ha apka lekh aapki soch...aap kuch bhi likh skte ha...par is sawal ka koi exact jawab ho hi nahi skta...
vaise apke jawab me ADARSHVAD adhik jhalakta ha..yahi YATHARTHVAD bhi hota toh ye aur behtar ho skta tha...
khair...shukriya hume apne apne sawal ka javab dene ka mauka dia...

shabnam khan ने कहा…

Mehfooz ji...apka jawab pda...jawab to sare hi logo ne sahi diye the..khair...apna apna nazariya ha...apka blog ha apka lekh aapki soch...aap kuch bhi likh skte ha...par is sawal ka koi exact jawab ho hi nahi skta...
vaise apke jawab me ADARSHVAD adhik jhalakta ha..yahi YATHARTHVAD bhi hota toh ye aur behtar ho skta tha...
khair...shukriya hume apne apne sawal ka javab dene ka mauka dia...

महफूज़ अली ने कहा…

Shabnam.......plz ek baar mera sawaal dekho na.......... sahi jawab kisi ke bhi nahi hain...........sabke kareeb kareeb sahi hain...... maine do shabd mein kaha hai.......... aur wo main nahi NCERT bhi kehta hai........... aur nahut saare historians.......... bhi.............. aur aadarshwaad to hoga hi.......... haan reality kuch aur hai.......... par sawaal to dekho............. kya hai.........? aur yahi exact jawab hai.........

aur jin logon ne sahi jawab diye hain.......... unke naam mention hain......... tumne jawab to diya......... wo jawab kum bhaashan zyada tha....... aur yeh mere tark hain........ par poori research ke saath........ ek bhi tark ko koi galat nahi kah sakta........ yeh sab facts pe based hain......

sawaal sirf yeh hai ki"HUM HISTORY KYUN PADHTE HAIN?" aur uska jawab sirf do shabd mein hi hoga.........

baaki yatharthwaad aur aadarshwaad to baad mein aata hai na.......

reality to main bhi jaanta hoon........ par sawaal sirf yeh hai ki kyun padhte hain?


ek baar sawaal padho? phir jawaab dekh lena.......

shabnam khan ने कहा…

Lagta ha Mehfooz ji apko meri Tippani pasand nahi ayi...kya kare hume har chiz ko alochnatmk drishti sedekhne ki adat ha...
halaki me 2bar jawab pad chuki thi par aapke kehne se ek baar aur pada...ek compliment to zaroor dena chahungi jawab dene k liye ki gayi research kabil-e-tareef ha....aage b aise hi likhte rahiye...aur hme motiovate kijiye....

ज्योति सिंह ने कहा…

itihaas hame apni sanskriti se jodkar rakhta hai aur jeevan ke utar-chadhav se avgat karata hai .yah pragti ka aadhar hai .yadi hame apne bhavishya me kadam rakhna hai aur use sundar banana hai to itihas ko janna aavyashyak hai .is par bahut kahane ki ichchha hai magar waqt nahi .achanak aana hua jo .

Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…

महफूज भाई आपका लिखा अच्छा लगा ...

पर पी.सी.गोदियाल जी से सहमत हूँ |

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

महफूज भाई ,
इतिहास पर आपने जो परिचर्चा करा दी उसके लिए बधाई.... . बौद्धिक चर्चायें न केवल नए विचारों व दृष्टिकोणों का प्रतिपादन करतीं हैं वरन एक निष्कर्षात्मक दिशा की और भी ले जातीं हैं
.... मेरा मानना है कि ' इतिहास एक ऐसा आईना है जिससे हम वर्तमान के लिए एक सबक सीखते हैं.' ...ऐसी चर्चायें करते रहिये

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