बुधवार, 30 सितंबर 2009

तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??




दुनिया की इस भीड़ में,
खोजता फिरता हूँ अपना मुकाम
हर चीज़ वो मिलती नहीं
जिसकी होती चाहत यहाँ,
क्या खोने के डर से,
मैं भूलूँ,
कुछ पाने की चाह यहाँ?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
 

48 टिप्पणियाँ:

raj ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??aap ne to sab kuchh pa liya asmaa mang ke..or kya rah gya..chand sitare sab aapke hue....ese kahte hai...kuchh pana..real achievment.....

Shobhna Choudhary ने कहा…

kya baat hai........आसमाँ paana chate ho......dua karti hu aapko आसमाँ mil jaye......all the best.....

Nirmla Kapila ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
जरूर माँगो सारा आसमां तुम्हारे लिये है बहुत सुन्दर चाहत है शुभकामनायें कि सपने पूरे हों

shikha varshney ने कहा…

क्या खोने के डर से,
मैं भूलूँ,
कुछ पाने की चाह यहाँ?

wah perfect write.....maangne ki jarurat nahi hai aapke haath main aasman....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

बहुत बढ़िया है।
बधाई!

M VERMA ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
===
फ़ैसले खुद अपने करो
हौसलो को अपने साथ रखो
आसमाँ तुम्हारा तुम्हे मिलेगा.
खूबसूरत रचना

'अदा' ने कहा…

खुदा भी आसमां को जब देखता होगा
महफूज़ इसे भी ले जाएगा ये सोचता होगा
सुन्दर चाहत है..
सपने ज़रूर पूरे होंगे आपके..

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत हीं सुन्दर भैया । शुभकामनायें ।

ओम आर्य ने कहा…

aap sab waise hi pa gaye ....itani sundar rachan jo kar di .......baki ke sare aapke khwaahish khuda pooree kare........aamin.

संजय भास्कर ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
शुभकामनायें कि सपने पूरे हों

Sanjay bhaskar

संजय भास्कर ने कहा…

aapki chahat jaroor puri hogi

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

जो चाहते रहिये, उसका न मिलना जैसे इस संसार का सच बन गया है । यह शाश्वत है कह नहीं सकता - पर निर्मम है कह सकता हूँ ।
आपने ठीक कहा - "जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

Suman ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??nice

Mithilesh dubey ने कहा…

भाई वाह क्या बात है। गर हो चाहत तो हो ऐसी । आपकी ये चाहत पूरी हो यही दुआ है ऊपर वाले से।

sadhana ने कहा…

दुनिया की इस भीड़ में,
खोजता फिरता हूँ अपना मुकाम
हर चीज़ वो मिलती नहीं
जिसकी होती चाहत यहाँ,

ye panktiya , bahut achhi lagi ...likhte rahiye

....

Satya.... a vagrant ने कहा…

amen.........

"लोकेन्द्र" ने कहा…

वाह....
चाहत में भी आसमां मांग बैठे......
अब तो तारे भी अपने और जहाँ भी अपना....
सुन्दर प्रस्तुति.......

अनिल कान्त : ने कहा…

अच्छी रचना है भाई जान

mehek ने कहा…

waah bahut khub,aasman hoga to taare apne aap mil jayebge.

अनूप शुक्ल ने कहा…

ये सही है भाई! आसमां मांग लो! तारे उसके साथ् पैकेज में मिलेंगे।

Udan Tashtari ने कहा…

कुछ पाने की चाह यहाँ?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

-बहुत उम्दा सोच!! सभी मांगे, सभी चाहतें पूरी हों, शुभकामनाएँ.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

लाजवाब्!
हम भी दुआ करते हैं कि ऊपर वाला आपकी चाहतें पूरी करे!!!!

Arvind Mishra ने कहा…

एक लोक कहावत की याद आ गयी -आधी छोड़ पूरी को धावे ,आधी मिले न पूरी पावे ! अंग्रेजों ने भी ऐसी कहावतें बनाई हैं ! यह सुमिरन करके फिर चाहे जो करें !

Pappu Yadav ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
Mahfooz Sahab,
ye sahi hai agar taaron ki chahat hai to aasmaan hi mangna padega, taare mangenge to Jugnu hi haath aayenge.
Bahut hi jiwant kavita, padhna accha laga.

वाणी गीत ने कहा…

"जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
जरुर मांगो ...बहुत शुभकामनायें ..!!

pallavi trivedi ने कहा…

हमारे यहाँ किसी को दो दिन की छुट्टी चाहिए होती है तो पांच दिन के लिए आवेदन देता है तब दो दिन मिलती है! आपने भी ठीक किया ..आसमान मांगेंगे तब तारे मिलेंगे!:)

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत और दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने! आपकी चाहत पूरी हो ये दिल से दुआ है हमारी!

GK Awadhiya ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना!!!

भाई, एक आसमां मांगकर आपने तो चांद, सूरज, सितारे सभी ले लिए!

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

कुछ पाने की चाह यहाँ?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

great!!!

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

हुजूर कुछ भी माँग लीजिए बस मन में विश्वास रखिए..सब मिलेगा...सुंदर भाव...
बधाई!!!

अर्कजेश ने कहा…

आसमां मांग लो सूरज को छोडकर
खुदा को पा लो खुदी को छोडकर

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहूत खूब लिखा है महफूज़ जी ............ आशा और उमंग के साथ आपके बागी तेवेर लाजवाब लगे .............

sada ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ

बहुत ही लाजवाब प्रस्‍तुति, शुभकामनाएं हर चाहत जल्‍दी पूरी हो ।

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

अरविन्द मिश्र जी की बात -आधी छोड़ पूरी को धावे ,आधी मिले न पूरी पावे ! ठीक लगी

और मान भी लो की मुक़द्दर बहुत तेज है, और मिल ही गया तो रखोगे कहा? सड़क पर तो अतिक्रमण के आरोप में फस जाओगे, इन्कमटैक्स वालों को मालूम हो गया तो आय से अधिक संपत्ति का कानून चपेटे में ले लेगा, भाई बहुत मुश्किल है इस दुनिया में, मांगना ही है तो गलत कर्म करने की बेहिसाब शक्ति मांगों, फिर कोई खतरा नहीं.............हा! हा!! हा!!! .....................

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

जो मिले वह कम है :) बहुत बढ़िया लिखा है आपने सुन्दर रचना .शुक्रिया

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
.......


bahut hi 'powerful' vichaar.

;)

शोभना चौरे ने कहा…

जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??
khubsurat andaj
man me hosle hai to kya jmi kya asman
abhar

जी.के. अवधिया ने कहा…

अरे हाँ, यह बताना तो भूल ही गया कि अपने लिए तो मीना कुमारी जी का शेर ही सही रहाः

टुकड़े टुकड़े दिन बीता
धज्जी धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था
उतनी ही सौगात मिली

पर तुम्हारे लिए दुआ हैः

जमीं मिले आसमां मिले
खुदा करे तुम्हें सारा जहां मिले

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

कविता में भाव बहुत सुन्दर है अली साहब , मगर बुरा न माने तो कविता की लय थोडा इस तरह होती तो और मजा आता ;

दुनिया की इस भीड़ में,
खोजता फिरे हूँ ,
अपना मुकाम कहाँ-कहाँ,
हर चीज़ वो मिलती नहीं
जिसकी होती चाहत यहाँ !

क्या खोने के डर से,
मैं छोड़ दूं ,
कुछ पाने की चाह,जहां-तहां?
जब चाहत हो तारों की,
तो क्यूँ ना माँगूं आसमाँ यहाँ??

Kindly don't take it in other way that I'm trying to teach you. I know that you write very good poems, even much better than me.

rukhsar ने कहा…

aap to ab asma ke peeche pade hue haen. milega apko.

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

लाजवाब कर गयी कविता। मुबारकबाद कुबूल फरमाएं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aasmaan pane ka khwaab awashya dekho,suraj tumhe mil hi jayega........

sanjay vyas ने कहा…

बढ़िया कविता लगी.अपनी चाह की सीमाओं को विस्तार देती.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

कितनी सुन्दर और जोश पैदा करने वाली रचना है..क्यूं न मांगूं आसमां..क्या बात है.

Manoj Bharti ने कहा…

जब तक चाह है
तब तक टूटेगी हर चाह
टूटते तारों की तरह
आह !
आकाश का आँचल हमारे पाँवों से शुरु होकर अनंत ब्रह्माण्ड तक फैला हुआ है ... क्या समेट पाएँगे इसे ? निश्चित ही चाह ही जब करनी है तो बड़ी ही करें,मगर टूटने से उसके स्वयं को न टूटने दें या कुछ ऐसा शाश्वत पा लें जो कभी टूटता नहीं ।

kshama ने कहा…

महफूज़ , हम पाते रहते हैं ...पर खोये लम्हें ज़्यादा याद रह जाते हैं ...दुआ करती हूँ आप ज़िंदगी में वो सब पायें , जिसके हक़दार हैं ..
आमीन !

ambuj ने कहा…

क्या खोने के डर से,
मैं भूलूँ,
कुछ पाने की चाह यहाँ?

bilkul nahi ji.. paane ki chaah hi to zinda rakhti hai.. yahi bhool jaaye to insaal jeena hi bhool jayega...

ओम आर्य ने कहा…

हाँ, तारों को रखने के लिए आसमान तो चाहिए हीं....

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