मंगलवार, 20 जुलाई 2010

मैंने अपने खोने का विज्ञापन अखबार में दे दिया है...: महफूज़

आज बहुत दिनों के बाद वक़्त मिला है कुछ लिखने का... वक़्त क्या .... समझ लीजिये मूड... बना है. इस दौरान सिर्फ पढ़ा है... और खूब पढ़ा है... लिखा भी है... वक़्त की कमी तो है ही... पर  वो कहते हैं ना कि वक़्त निकालना पड़ता है , सो, आज वक़्त निकाल लिया... एक बड़े गुमनाम से कवि हैं...श्री. सुभाष दशोत्तर जिनका देहांत १९७७ में ही हो गया था... उन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने १९७७ में सम्मानित भी किया था... उनकी लिखी बहुत सी रचनाएँ... पढ़ीं.... उनको पढ़ कर ऐसा लगा कि ... अगर इन्हें नहीं पढ़ा तो कभी साहित्य नहीं पढ़ा.. मगर अफ़सोस शायद ही उन्हें कोई जानता हो या फिर किसी ने उनका नाम सुना हो... सुना है कि १९७७ में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें बहुत मजबूरी में सम्मान दिया था... क्यूंकि वो किसी लौबी में शामिल नहीं थे... नहीं तो यहाँ .... एक से एक नालायक बैठे हैं... जो लॉबिंग करके कई पुरुस्कार पा लेते हैं... और ख़ुद को लेखक/कवि बोलने लगते हैं... 


अच्छा! आजकल मैं बहुत घमंडी किस्म का हो गया हूँ... पता नहीं यह घमंड है या फिर सेल्फ-कॉन्फिडेंस ... या फिर सुपीरियरटी कॉम्प्लेक्स... मुझे तो घमंड लगता है... आजकल मैं बहुत चूज़ी भी हो गया हूँ .... पहले मैं लड़कियों की खूबसूरती नहीं देखता था... सिर्फ दिमाग़ देखता था... इंटेलिजेंट लड़कियां मुझे बहुत अपील करतीं हैं.... लेकिन, आजकल मुझे सिर्फ ख़ूबसूरत लड़कियां ही पसंद आ रही हैं... अब दिमाग़ को मैंने सेकंडरी कर दिया है... हमारे लखनऊ में इंदिरा नगर में एक्सिस बैंक है... उस ब्रांच में एक से एक सुंदर लडकियां हैं... अभी वहां अकाउंट खुलवाया है... वो भी बिना मतलब में... सिर्फ.... इसीलिए क्यूंकि वहां की एक एक्ज़ीक्यूटिव जो कि बहुत सुंदर है... उसने बहुत प्यार से कह दिया था... अब वहां रोज़ का आना जाना हो गया है... और सच कह रहा हूँ... कि वहां की जितनी भी सुंदर लड़कियां हैं...  वो सारी लड़कियां दिमाग़ से पैदल हैं... इसलिए यह भी सही कहा गया है कि सुंदर लड़कियों के पास दिमाग़ नहीं होता...हाँ! एक्सेप्शंस हर जगह होते हैं... एक्सिस बैंक फ़ाइनैन्शियल बैंक कम ब्यूटी बैंक ज़्यादा लगता है...  सुन्दरता भी क्या चीज़ है ... कितना अपील करती है... जो लोग यह कहते हैं कि सुन्दरता मायने नहीं रखती ... गलत कहते हैं... मैं ख़ुद गलत था... हम जब बाज़ार में सब्ज़ी भी खरीदने जाते हैं... तो जो सब्ज़ी सबसे सुंदर और ताज़ी नज़र आती है... उसे ही खरीदते हैं... इसी तरह हम सुंदर लोगों को भी पसंद करते हैं.... अब यह बात अलग है... कि... Beauty lies in the eyes of the beholder... 

अच्छा ! चलिए अब थोडा सा सीरियस हो जाया जाये.... बहुत तफ़रीह कर लिया .... इसी बात पे तो वाणी दीदी मुझे "नौटंकी" कहतीं हैं.... कितने प्यार से कहतीं हैं.... उनका अंदाज़ ही अलग है....आज कविता लिखी है जिसकी इंस्पीरेशन मुझे श्री.सुभाष दशोत्तर जी को पढने के  बाद मिली है... पता नहीं क्यूँ कुछ लोग मरने के बाद भी ग़ुमनाम हो जाते हैं.... तो पेश है कविता ... बताइयेगा कैसी लगी...  

मेरे खोने का विज्ञापन...

मैंने अपने खोने का विज्ञापन
अखबार में दे दिया है,
जो कोई मुझे 
तलाश कर के लाएगा,
आने-जाने के खर्च के साथ
इनाम भी पायेगा.
मेरा जोश 
अब ठंडा पड़ गया है...
अब मेरे भीतर कई विचार 
एक साथ नहीं चल पाते 
शायद ....
मेरे विचारों पर धारा 
एक सौ चव्वालिस
लागू होती जा रही है....


N.B. मेरा एक इंग्लिश पोएट्री का ब्लॉग भी है... जिसे अभी लिखना शुरू किया है... उम्मीद है पसंद आएगा... वैसे मैं इंग्लिश पोएट्री इस वेबसाईट पर लिखता हूँ... जहाँ मेरी तकरीबन सात सौ इंग्लिश कवितायेँ हैं... 
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