शनिवार, 23 नवंबर 2013

###एक कविता: रेनेसांस (Renaissance)###





विचारक जागते हैं जब,
करवट विश्व लेता है,
पुराना देश धरती पर,
नए इम्तिहान देता है,
क्रान्ति के तूफ़ान उठते हैं
मौत की बाहें बढ़ी है,
रात ने एड़ी बजाई
भोर पहरे पर खड़ी है।

© महफूज़ 

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