गुरुवार, 20 अगस्त 2009

जब भी तुम्हें .......


कविता!!!!!!!!!!!


जब भी तुम्हे लिखता हूँ,

तुम किसी की कहानी बन जाती हो।

जब भी तुम्हें सुनता हूँ,

तुम किसी की ज़ुबानी बन जाती हो।

जब भी तुम्हें पढ़ता हूँ,

तुम किसी की यादें बन जाती हो।

जब भी तुम्हें याद करता हूँ,

तुम कविता बन जाती हो॥

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