शनिवार, 19 सितंबर 2009

आईये जानें टाटा (TATA) का सच:-- एक ऐसा सच जो सोचने को मजबूर कर दे... ब्लॉग जगत में एक बहुत बड़े रहस्य से पर्दा उठा.



पिछली पोस्ट में आप लोगों ने CLEAN CHIT और बाबू के बारे में जाना। आईये, आज मैं आप लोगों को टाटा (TATA) का सच बताता हूँ।


हम में से सब लोगों ने टाटा (TATA) शब्द सुना है और इसका इस्तेमाल अपनी आम ज़िन्दगी में हम सब रोज़ाना करते हैं। इस टाटा (TATA) शब्द का इस्तेमाल हम सब तब करते हैं जब हम किसी मेहमान को विदा करते हैं या जब हम किसी के घर मेहमान बन के जाते हैं, तो मेज़बान हमें घर के बाहर कर विदा करते हैं तो हम टाटा-बाय-बाय का इस्तेमाल करते हैं। हम भी जवाब में टाटा(TATA) और बाय-बाय (bye-bye) कहते हैं। और विदा ले लेते हैं। इस टाटा (TATA) को हम लोगों ने अपनी ज़िन्दगी में कहीं अन्दर तक आत्मसात् कर लिया है। और गाहे बगाहे सम्मान प्यार के साथ इस शब्द को रोज़ाना बोलते हैं।


पर यहाँ भी गौर करने वाली बात है कि हम रोज़ाना DICTIONARY देखते हैं पर इस शब्द को कभी भी हमने खोजने या जानने कि कोशिश नही की। यह शब्द जब भी हम भारतीय DICTIONARY में देखेंगे तो यह शब्द हमें COLLOQUIAL (यानी की आम बोल-चाल के शब्द ) के रूप में मिलेगा कि किसी संज्ञा या विशेषण के रूप मेंजब भी हम इस शब्द को शब्दकोष में देखेंगे तो वहां इसका ORIGIN UNKNOWN दिखाई देगायह शब्द कभी भी हमको कहीं विशेष रूप से प्रयोग होता साहित्यिक अकादमिक क्षेत्र में नहीं मिलेगा


यह टाटा (TATA) शब्द सिर्फ़ और सिर्फ़ भारत और पाकिस्तान में ही बोला जाता हैइन दो देशों के अलावा यह शब्द दुनिया के किसी भी देश में चाहे वो अँगरेज़ देश ही क्यूँ हों, में नहीं बोला जाता। ही कोई अँगरेज़ इसको किसी को सम्मानपूर्वक विदा करने के लिए कभी प्रयोग करता हैक्यूंकि अँगरेज़ टाटा (TATA) का मतलब ही नहीं जानते


तो फिर यह भारत और पाकिस्तान में ही क्यूँ बोला जाता है?


यह जानने के लिए हमें फिर ढाई सौ साल पीछे जाना पड़ेगा जब भारत पे अंग्रेज़ों का शासन था। दरअसल टाटा (TATA) कोई शब्द ही नही हैयह एक प्रकार का SLANG है। (SLANG वो शब्द होते हैं जो क्षेत्रीय भाषा से एक अपमानसूचक शब्द के रूप में निकले होते हैं....... जैसे कि "बे ".... हम लोग बोलतें हैं ...." क्या है बे ?")


तो टाटा (TATA) भी एक प्रकार का SLANG है, जिसको अँगरेज़ उनकी औरतें (मेम) भारतीय स्त्रियों उनके बच्चों को पुकारने के लिए इस्तेमाल किया करते थेअँगरेज़ टाटा (TATA) का इस्तेमाल भारतीय स्त्रियों उनके बच्चों को हिकारत से भगाने के लिए करते थे , जिसको हम भारतीयों ने सम्मानपूर्वक आत्मसात् कर लियाउदाहरण देखिये ज़रा: जब भारतीय औरतें अंग्रेज़ों के ऑफिस और घरों में काम करने जातीं थीं तो अपने बच्चों को भी साथ ले जातीं थीं, और जब काम से वापिस लौटतीं थीं तो यह अँगरेज़ उन्हें टाटा (TATA) बोलकर विदा करते थे..... अब क्यूँ करते थे ....यह अभी पता चल जाएगा..... और हम भारतियों ने बिना सोचे समझे इस शब्द को अपना लिया




आइये अब जानें टाटा (TATA) का मतलब क्या है?





पहले हम इस शब्द कि उत्पत्ति को देखते हैंसन् 1823 में यह शब्द England में BBC में एक नाटक प्रस्तुति के दौरान इस्तेमाल किया गया, उस नाटक में एक नवजात शिशु का भी किरदार था और एक बेवकूफ सफाइवाली औरत का भी किरदार था जो कि भारतीय थी उसका नाम उस किरदार में Mrs. Mopp था(और MOPP का मतलब अंग्रेजी में ....पोछा मारने को कहते हैं....)
नाटक जब खेला जा रहा था तो वो अँगरेज़ शिशु अचानक उस भारतीय स्त्री को देखते ही ता-ता (ta-ta) कि आवाज़ में रोने लगा , जिसको अंग्रेज़ों ने समझा कि बच्चा उस भारतीय स्त्री से डरकर टाटा बोल रहा है और उस भारतीय स्त्री को भगाने के लिए कह रहा हैतबसे अँगरेज़ हम भारतीय को टाटा कहने लगे..... आज भी England में बच्चों को तिरस्कृत करने के लिए अँगरेज़ टाटा (TATA) बोलतें हैं। कई बार अँगरेज़ बड़े स्तन वाली भारतीय महिलाओं को भी टाटा बोलतें हैं। Salman Rushdie कि नोवेल, THE MIDNIGHT'S CHILDREN में इसका उल्लेख है




एक जानी मानी ट्रेवल कंपनी MAKEMYTRIP.COM ने अपने उत्पाद में टाटा (TATA) का प्रयोग कियाजिस पर भारतीय कंपनी TATASONS ने आपत्ति ज़ाहिर कि और कहा कि टाटा (TATA) शब्द उनके नाम पर TRADEMARKED है जिसे और कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता और WORLD INTELLECTUAL PROPERTY ORGANIZATION के तहत् TATASONS ने यह केस 14TH SEPTEMBER 2009 को जीत लिया


अब देखने वाली बात यह है कि अगर TATA कोई शब्द होता तो ख़ुद TATASONS भी इस पर कोई दावा नहीं कर सकती थी क्यूंकि शब्दों को आप PATENT और TRADEMARK नहीं करवा सकते। और यह भारत का सबसे पुराना TRADEMARK है..... तो यह साबित है कि टाटा (TATA) कोई शब्द ही नही है.......


आइये अब जानें भारतीय टाटा (TATA) घराने का नाम टाटा (TATA)क्यूँ पड़ा?


गुजरात और मुंबई शहर में पारसियों कि तादाद सबसे ज़्यादा है पारसी पादरियों को तात् यानी की पिता कहा जाता है, संस्कृत में भी तात् का मतलब पिता ही होता है. जमशेदजी तात् (टाटा) जिनका जन्म गुजरात के नवसारी ज़िले में 03 MARCH 1839 को एक पारसी पादरी श्री। नासेर वांजी के यहाँ हुआ। जब जमशेदजी बड़े हुए तो चूँकि वो पादरी खानदान से ताल्लुक रखते थे, और उस समय के लोग पादरियों को तात् बुलाते थे ...आज भी बुलाते हैं खैर... तो सब लोग उन्हें जमशेदजी तात् बुलाते थे.... लेकिन अँगरेज़ तात् बोल नहीं पाते थे.... तो उन्होंने तात् को TATA कर दिया.... जैसे ठाकुर को टैगोर ..... तबसे तात् खानदान टाटा (TATA) हो गया .... अब चूँकि वो अंग्रेजी में तात् लिखेंगे.... तो TAATA लिखा जायेगा ...... जिसे अँगरेज़ टाटा पढ़ते थे .... बाद में आगे चल के टाटा (TATA) ने इस नाम को TRADEMARK करवा लिया..... और इस तरह टाटा घराने का नाम TATA पड़ा .......



तो निष्कर्ष यही है...कि टाटा (TATA) कोई शब्द नहीं है. इसका कोई मतलब नहीं है. यह सिर्फ एक शब्द विशेषण है जिसका प्रयोग हम GOOBYE या किसी को विदा करने के लिए करते हैं जो कि हमें नहीं करना चाहिए क्यूंकि इसका प्रयोग अँगरेज़ हमें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए करते थे.... जिसको हम भारतीय समझ नहीं पाए और अपनी ज़िन्दगी में इस शब्द को एक सम्मानजनक स्थान दे बैठे.... आज भी हमें यह सोचना चाहिए.... कि शब्द बोलते हैं.... अगर हम लिखे हुए शब्दों को ध्यान से देखें.... तो हर शब्द हमें कुछ कहते ही दिखाई देंगे... गुस्से को ज़रा ध्यान से लिखा देखिएगा .... तो गुस्से कि शक्ल आपको गुस्से में ही दिखाई देगी.... ऐसे ही ख़ुशी को देखिएगा ....ख़ुशी शब्द आपको खुश ही दिखाई देगा.... इसलिए शब्द हमारी ज़िन्दगी में बहुत ही मायने रखते हैं..... हमें किसी भी शब्द को सिर्फ इसलिए ही नहीं इस्तेमाल करना चाहिए.... कि वो शब्द उच्च कोटि कि भाषा के हैं.... क्या पता वो शब्द हमें अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया गया हो..... अँग्रेज़ी में लिखा गया या बोला गया है.... तो इसका मतलब यह नहीं है.... कि वो शब्द सही ही हो..... हर शब्द कि अपनी कहानी है.... अपनी पैदाइश है..... जैसे हम अपना इतिहास जानते हैं.... और हमारा भी इतिहास होता है ...ठीक उसी तरह शब्दों का भी इतिहास होता है..... जिस तरह किसी के पिता का नाम नहीं मालूम होता ...तो उसे हम बहुत ही गिरी निगाह से देखते हैं.... उसी तरह जिस शब्द कि उत्पत्ति न पता हो.... वो शब्द भी गिरा हुआ होता है..... तो ऐसे किसी गिरे हुए को क्यूँ अपनाना .....???????





DISCLAIMER: प्रस्तुत लेख तथ्यों पर आधारित है... किसी को अगर कोई आपत्ति हो तो तुंरत बताये....









66 टिप्पणियाँ:

'अदा' ने कहा…

are waah Mahfooz sahab,
fir ek zabardast baat kah di aapne..
ab to ham kisi to bhi TATA kah sakte hain ha ha ha
bahut acchi jaankaari milti hai aapke blog se..
ek baar aur aayenge tipanni karne abhi zara jaldi mein hain...
BYE (TATA nahi...)

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

bhai,mujhe nahi pata tha aapki itihaas bhi itani badhiya hai aap jaise bhi jo kuch likhate hai padhane layak hota hai aur jnyanvardhak bhi,,bahut sundar TATA ke bare me achchi jaankaari mili..badhayi dost..

Mithilesh dubey ने कहा…

बहुत खुब महफूज भाई, क्या कहें आपके इस पोस्ट के बारें मे, शब्द कम पड़ रहे है। आप अपने लेख के माध्यम से हमे जागरुक करने का काम कर रहें है बहुत-बहुत बधाई । और साथ ही हमें ये भी जानने को मिल रहा है कि अंग्रेज तो चले गये लेकिन उन्होने हमे अब भी मानसिक रुप से गुलाम बनाये रखा है। आपके इस लाजवाब पोस्ट के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें।

अनिल कान्त : ने कहा…

बड़ी दिलचस्प जानकारियाँ खोज खोज कर लाते हैं आप भाई जान

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

महफूज़ भाई, क्या बात है. बाबू शब्द का सनसनीखेज़ खुलासा करने बाद आपने यह TATA की जो वाट लगाई है, वह वाक़ई क़ाबिले तारीफ़ है, साथ ही हमारे समाज में अंग्रेज़ों की गुलामी आजतक हमारे दिलो-दिमाग़ से नहीं गयी है, बाबू और TATA की तरफ न जाने कितने लफ्ज़ हमारे मुआशरे में कितने आम हो चुके हैं. हमें गौर करना चाहिए.

लानत है उन पूर्वी समाज के कथित ठेकेदारों पर जो अपने आपको राष्ट्रवादी तो कहलवाना पसंद करते हैं लेकिन समाज में व्याप्त इन छोटी-छोटी मगर बेहद गंभीर मसलों पर उनकी चुप्पी और नपुंसकता उनकी पोल खोल देती है.

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

महफूज़ भाई, क्या बात है. बाबू शब्द का सनसनीखेज़ खुलासा करने बाद आपने यह TATA की जो वाट लगाई है, वह वाक़ई क़ाबिले तारीफ़ है, साथ ही हमारे समाज में अंग्रेज़ों की गुलामी आजतक हमारे दिलो-दिमाग़ से नहीं गयी है, बाबू और TATA की तरफ न जाने कितने लफ्ज़ हमारे मुआशरे में कितने आम हो चुके हैं. हमें गौर करना चाहिए.

लानत है उन पूर्वी समाज के कथित ठेकेदारों पर जो अपने आपको राष्ट्रवादी तो कहलवाना पसंद करते हैं लेकिन समाज में व्याप्त इन छोटी-छोटी मगर बेहद गंभीर मसलों पर उनकी चुप्पी और नपुंसकता उनकी पोल खोल देती है.

M VERMA ने कहा…

बहुत सशक्त ढंग से आपने सबूतो और तथ्यो के साथ टाटा शब्द की पोल खोली है.
हर शब्द की एक अंतर्कथा है. शब्द समयांतर मे अपने अर्थ और यहाँ तक की अपने स्वरूप मे परिवर्तन करते रहते है.
अच्छा लगा आपका विश्लेषण

Suman ने कहा…

nice.........nice........nice.......

khursheed ने कहा…

अरे वाह महफूज़ भाई, आप अच्छे रचनाकार तो है ही, एक अच्छे और सच्चे हिन्दोस्तानी भी. देश में व्याप्त इन छोटी छोटी बुराईयों जो की शब्द के रूप में मौजूद हैं पर आपका यह तिसरका प्रहार वाक़ई काबिले तारीफ़ है, लगे रहिये.

स्वच्छ सन्देश की के दुसरे पैरा से पूरी तरह सहमत

Satya.... a vagrant ने कहा…

prasansaniya ekh .
umda
tathya evam janakai parak.

ashha unruop hai mehfooj bhai

समीउद्दीन नीलू ने कहा…

मैं आपके ब्लॉग पर पहली मर्तबा आया हूँ, मगर मैं क़ायल हो गया आपके हर-फ़न का. आप का या लेख अति विशिष्ट श्रेणी में आता है. सौ में सौ.

संगीता पुरी ने कहा…

पहले बाबू और फिर टाटा का इतिहास .. आप हमारे लिए क्‍या खूब जानकारी लाए हैं .. हम भारतीयों की सोंच भी गजब है .. कैसे बिना समझे बूझे किसी भाषा का उपयोग हम कर लेते हैं .. आशा है भविष्‍य में भी आप इस प्रकार की जानकारियां ढूंढकर लाते रहेंगे !!

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

महफूज भाई,
कहाँ-कहाँ से खोज के लाते हैं आप ऐसे तथ्यपरक अद्भुत जानकारी. तारीफ करनी होगी आपकी और आपके शोधपरक व्यक्तित्व की.
पर एक बात है, कि अब हम सब को बहुत सोच-समझ कर ही शब्दों का प्रयोग करना पड़ेगा, क्योंकि "महफूज़ शब्दार्थ वेब कैमरे" से लगता है कि अब बच पाना मुश्किल है,

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

वाह...वाह....।
महफूज अली जी!
एकदम नई, आश्चर्यजनक और बड़ी उपयोगी
जानकारी दी है।
आपकी मेहनत और खोज के लिए बधाई!

Suresh Chiplunkar ने कहा…

बेहतरीन जानकारी… आपका बहुत आभार…।
लेकिन लगता है सलीम मियाँ और खुर्शीद पर किसी "बाहरी हवा" का प्रकोप हो गया है… और हर पोस्ट में उन्हें "राष्ट्रवादी" बाधा दिखाई देने लगी है…। भगवान या अल्लाह (जिससे वे चाहें) उनका भला करे… उन्हें ठीक करे…

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खुब महफूज भाई, क्या कहें आपके इस पोस्ट के बारें मे, शब्द कम पड़ रहे है
बड़ी उपयोगी
जानकारी दी है।
आपकी मेहनत और खोज के लिए बधाई!
बेहतरीन जानकारी… आपका बहुत आभार…।

'अदा' ने कहा…

महफूज़ साहब,
हर बार आप अपने लेख में एक नई परन्तु अहम् जानकारी लिए हुए आते हैं ...
और सबसे बड़ी बात यह है कि इन लेखों के द्वारा आप न जाने कितनी भ्रांतियों को उनकी जगह दिखा रहे हैं...
आप एक सच्चे भारतीय हैं .... आप पर गर्व होता जा रहा है...
हम ये बातें नहीं कहते तो सिर्फ इसलिए कि हम नहीं जानते हैं और शायद जानने की कोशिश भी नहीं की कभी, इसे हमारी कमजोरी कहा जा सकता है लेकिन 'नपुंसकता' नहीं...
रविन्द्र नाथ ठाकुर , रविन्द्र नाथ टैगोर कैसे बने यह पता था, कलकात्ता ...कलकत्ता कैसे बना शायद ये भी लोग जानते हैं...लेकिन tata की कहानी बता कर आपने हमारे समाज पर एक उपकार किया है ...अब लोग किसी को tata कहने से पहले सोचेंगे न...!!
हम तो आपको एक सच्चे हिन्दुस्तानी के रूप में देख रहे हैं जिसने अंग्रेजियत से सने हुए समाज को सही आईना दिखने की ठान ली है ...बस ऐसे ही आप हमें बताते जाइए...
और पाठकों से भी अनुरोध है की इनबातों को सिर्फ पढ़ कर भूल मत जाइए उसे अत्सात भी करें और लोगों को भी बताएं....और ये भी बताएं की इसकी जानकारी महफूज़ साहब ने तथ्यों के साथ दी है....
अब आज्ञा चाहेंगे.....

ambuj ने कहा…

kamal hai.. aisi cheejon par dhyaan dena .. buraaiyan nikaaal kar sabko unke baare mein batana... wakai bahut accha kaam kar rahe hain aap...

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

Mahfooz bhai

Kya likha hai
Waah
Main kya kahun
Itni jaankari kahan se le aayr bhai
Maine to ye jaanta hi nahi tha

Itni naaazok baat hum tak pahunchane ke liye shukriya mere dost

Vijay

sareetha ने कहा…

आजकल ओके,सी यू,गुड बाय चलन में हैं । ज़रा इनके पूर्वजों की पड़ताल भी कर ही डालिये । वैसे शब्द की अपनी कोई ज़ात नहीं होती । जैसे भाव होते हैं शब्द भी वैसा ही रुप धर लेता है ।

Udan Tashtari ने कहा…

गज़ब. २०० साल पुराना नाटक और टाटा शब्द की खोज...क्या दूर दूर तक खोज बीन की गई है.

एक बेहतरीन जानकारीपूर्ण आलेख. बहुत खूब. जारी रहिये.

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
महफूज साहब,
सोच रहा हूँ क्या कहूं?
एक ही लफ्ज़ दिमाग में आता है...
बेहतरीन!!!

Arvind Mishra ने कहा…

जोरदार जानकारी -आभार !

शरद कोकास ने कहा…

"बेवकूफ सफाइवाली औरत का भी किरदार था जो कि भारतीय थी उसका नाम उस किरदार में Mrs. Mopp था " इस तथ्य को ज़रा फिरसे देख लेना क्योंकि यह नाम तो भारतीय नही है । शब्दों का इतिहास बहुत रोचक होता है अपने अजित वडनेरकर जी निरंतर यह कार्य कर रहे हैं और इसे पुस्तकाकार भी दे रहे हैं । यह लेख तुम्हारी जिग़्य़ासु पृवृत्ति का परिचायक है । हर लेखक के भीतर यह होना चाहिये । प्रश्न यह है कि इस मुकदमे के बाद bayddhika sampadaa kaanoona के तहत लेखन मे इस शब्द का इस्तेमाल कर सकेंगे या नही ? इसका भी पता लगाओ । शुभकामनाएं ।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

वाह्! महफूल जी! इस शोधपरक लेख के लिए आपकी जितनी तारीफ की जाए कम है। बहुत बढिया जानकारी दी़।
ये बात भी आपने बिल्कुल सही कही कि शब्द बोलते हैं.... अगर हम लिखे हुए शब्दों को ध्यान से देखें.... तो हर शब्द हमें कुछ कहते ही दिखाई देंगे"

भूतनाथ ने कहा…

अरे बाप रे....अरे महफूज.....ये क्या कर रहे हो यार....अपना तो भेजा ही फ्राई हो गया....टाटा को पढ़ते-पढ़ते....अच्छा टाटा....अरे सॉरी भाई ....बाय-बाय....!!

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत हीं सुन्दर भैया । जबर्दस्त धमाका किया है आपने । पढ़कर मजा आ गया ।

Apoorv ने कहा…

बड़ी खतरनाक किस्म की जानकारी लाते हैं आप महफ़ूज़ भाई..किधर खुदाई कर रहे हैं आजकल आप..और शब्दों की anatomy के बारे मे मैं बिल्कुल सहमत हूँ आपसे.

Shobhna Choudhary ने कहा…

aapki writing skill ki TARIF ke liye SHABAD hi search karna mushkil hai.......vakai KAABILE TARIF......

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी "में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

ओम आर्य ने कहा…

दो सौ साल के अंग्रेज राज से मुक्त करने का महफूज़ भाई का ये प्रयास सराहनीय है ...

पर
चीजें इतनी आसानी से जाती नहीं है, जब वो संस्कृति का हिस्सा हो जाती हैं...पर प्रयास जारी रहने चाहियें.

आजकल जींस पैंट कितना चलन में है...मुझे जहाँ तक पता है...किसी ज़माने में कठिन श्रम करने वाले लोगों का पहनावा था. इसे धोने की कम जरूरत है और ज्यादा दिन चलती है. पर आज यह संस्कृति में इस तरह घुल मिल गया है कि आजकल फैशन में है...

महफूज़ भाई..कभी इस जींस के इतिहास में भी जाएँ और हमें बताएं कि ये किस तरह उपयोग में लिया जाता था..

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

अच्छा शोधपरक आलेख ...टाटा को टा टा कर देने में अधिक समझदारी है

रश्मि प्रभा... ने कहा…

gahan adhyayan ka ek gahan hissa tumne hamen bhi diya.......tumhe sammanit karna chahiye

Pappu ने कहा…

Mahfooz ji,
kya jaankaari di aapne bas anand aa gaya. Nit nayi baat dekhne ko milti hai apke blog par. gahan shodh kiya hai apne aisa lagta hai. jaisi baatein aap bata rahein vastav mein aapko sammanit karna hi chahiye. aap aisi hi jaankariyan hamein dete rahiye pata to chale angreji sabhyata ke hiamaytiyon ko ki angrej hamen kya sochte they/hain aur ham unhein bhagwaan banaye baithe hain.
aaj ki aapki post ek shreshth lekhan darshaati hai.
jaari rahiye..

Pappu ने कहा…

Mahfooz ji,
kya jaankaari di aapne bas anand aa gaya. Nit nayi baat dekhne ko milti hai apke blog par. gahan shodh kiya hai apne aisa lagta hai. jaisi baatein aap bata rahein vastav mein aapko sammanit karna hi chahiye. aap aisi hi jaankariyan hamein dete rahiye pata to chale angreji sabhyata ke hiamaytiyon ko ki angrej hamen kya sochte they/hain aur ham unhein bhagwaan banaye baithe hain.
aaj ki aapki post ek shreshth lekhan darshaati hai.
jaari rahiye..

वाणी गीत ने कहा…

"टाटा" शब्द ने इस प्रकार आकार लिया होगा ..हमारी समझ और कल्पना से बाहर की बात थी..इतिहास और हिंदी शब्दों की तुम्हारी जानकारी और उत्सुकता प्रभावित करती है ..अंग्रेजों की तो तुम पोल खोल ही रहे हो..साथ ही सांप्रदायिक सदभाव की मिसाल भी कायम हो रही है इस ब्लॉग पर..बहुत बढ़िया..ऐसे ही लगे रहो मुन्ना भाई इस तथ्यपरक शोध के लिए बहुत आभार..!!

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! "टाटा" शब्द का प्रयोग तो हमेशा करते हैं पर इसका सठिक अर्थ मालूम नहीं था! आपने बड़े ही सुंदर ढंग से "टाटा" शब्द को विस्तार किया है! बहुत ही अच्छी और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई! मुझे और भी दिलचस्प लगा आपका पोस्ट क्यूंकि मेरी जन्मभूमि टाटानगर है! मैं टाटानगर में पैदा हुई और वहीं पे पली बड़ी हूँ इसलिए जमशेदजी टाटा के बारे में बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ!

Nirmla Kapila ने कहा…

महफूज़ भाई जोएादार धमाका किया है अपने लिये तो
ये नई और अद्भुत जानकारी है शब्दों का इतिहास् इतना दिलच्स्प हो सकता है ये तो आज ही पता चला । कहाँ से ढूँढ लाते हो ऐसी अद्भुत जानकारियां? बहुत बहुत धन्यवाद अगली ऐसी ही धमाके दार पोस्ट का इन्तज़ार रहेगा आभार्

Uttama ने कहा…

वाह महफूज़ जी, नयी और अच्छी जानकारी पायी आपसे.

Dipti ने कहा…

बहुत बढ़िया...

Manish Kumar ने कहा…

शु्क्रिया इस नई जानकारी के लिए।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लाजवाब और रोचक इतिहास टाटा शब्द और उसकी उत्पत्ति के बारे में .......... और अपने टाटा ग्रुप के बारे में ........

जी.के. अवधिया ने कहा…

महफूज़ जी, बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने!

मैं पहली बार आपके ब्लोग में आया हूँ। बहुत अच्छा लगा!

क्या ओके के बारे में भी आपने जानकारी दी है?

mehek ने कहा…

bahut rochak jankari rahi,khas kar tata group ke naam mein baare mein jaan thoda GK level incerease ho gaya.ab hindustani ram ram ya alvida ka istemaal karna padega.

रौशन ने कहा…

कभी ध्यान ही नहीं दिया की ये शब्द है भी या नहीं जानकारी अच्छी लगी
टाटा घराने की सफलता के बाद तो ये शब्द हो ही गया है

mukesh ने कहा…

सच कहा शब्द बोलते है . रोचक जानकारी के लिए धन्यवाद् !!

रज़िया "राज़" ने कहा…

वाह!!!! हर वक़्त नयी नयी जानकारी!!!
महेफ़ूज़ अली वाह! बहोत खूब॥

बाबू के बाद टाटा की एक और जानकारी। हर वक़्त एक नयी पोस्ट के इंतेज़ार में।

अर्चना तिवारी ने कहा…

बहुत रोचक जानकारी दी आपने..हमें इसके बारे में आज पता चला ...आभार

sanjay vyas ने कहा…

वाह, नई, रोचक जानकारी के साथ आपकी कलम की खूबी भी देख ली.बधाई.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

कमाल की जानकारी दी है महफ़ूज़ जी आपने. काफी मशक्कत भी करनी पडी होगी आपको इतनी तथ्यपरक जानकारियां जुटाने में.लेकिन हम सब का बहुत भला कर रहे हैं आप.

SACCHAI ने कहा…

" wah , bahut hi sashakat jankari ke liye sabse pahle aapka aabhar ... "TATA" ye alfaz na jaane kaise hamare saath juda tha ye ek sawal muje bhi sata raha tha ...magar ab nahi .....sahi vishleshan aur sahi alfaz ke zariye aap bahut kuch baato per se parda hatane me kamyab huve is liye ek baar aur hamari aur se subhkamnaye aur ...."

" jald se jald ek aur aisi post aapke blog per ile ye binti "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

http://hindimasti4u.blogspot.com

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

तो टाटा शब्द तात से निकला है । तात तो बडा सम्माननीय शब्द है तात संस्कृत में पिता को कहते हैं । शायद इस तात का अर्थ भी यही हो जैसे गाधीजी को बापू कहा जाता है उसी तरह ।
बहुत अच्छा लगा जान कर । अंग्रेजों की छोडिये उन्हे तो हमारी भाषा को तोडने मरोडने में ही मज़ा आता था ।

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

महफूज़ साहब, एक और अच्छा विश्लेषण

हैपी ब्लॉगिंग

raj ने कहा…

sabse pahle ied mubarak...fir akhbaar me chhapna mubarak....or tata ke bare me to mujhe pata tha..ye sari cheeze main pahle se janti thi..aisa kahun to jhhutth hoga aap ne btaya to pata chala..or aap kya सन् 1823 में bhi the??etne purane to nahi lagte...indeed a gud post.....congrats once again...may god bless u.....

sreena ने कहा…

बेहतरीन जानकारी…लाजवाब पोस्ट ...शुभकामनाएं....

प्रकाश पाखी ने कहा…

महफूज भाई,
मैं अनुमान लगा सकता हूँ कि कितनी महनत से इतनी उपयोगी जानकारियाँ संकलित कि होंगी.आश्चर्य कि बात है कि यह प्रश्न पहले हमारे दिमाग में क्यों नहीं आया,बहरहाल एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार!
बधाई!

rukhsar ने कहा…

One thing to say for sure, you are superb. I saw your article in patna in the newspaper. What to say now? wrangler? or genius or ?

Well! I have no words for you.

sada ने कहा…

यह कोई साधारण सी जानकारी नहीं थी, एक पूरा इतिहास था जिसे अपनी इतनी खूबी से व्‍यक्‍त किया एक बार जो पढ़ना शुरू किया तो पूरा पढ़ने के बाद ही लेख से नजर हटी जितनी भी तारीफ की जाये वह कम होगी, बहुत - बहुत आभार के साथ बधाई भी आपकी कलम यूं ही सफलता की नित नई सीढि़या चढ़ती रहे !!

naval ने कहा…

tata ke barye mien sach me ek badhiya jankari....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बडी गजब की जानकारी खोज कर लाए हैं। इस शोध परक पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Maansi ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार!!

'अदा' ने कहा…

Mahfooz sahab,
hamne suna ki aapka yah lekh paper mein bhi chapa hai...ham to canada mein rehte hain kaise dekh sakte hain jara bataiyega ?
'ada'

shikha varshney ने कहा…

अरे कहाँ कहाँ से तथ्य ढूँढ कर लाते हैं आप.? एकदम कायदे से टाटा कि पोल खोली है आपने.आप कहें तो रतन टाटा तक बात पहुंचा दूं ? [:)] वेसे उनके लोगो का इस्तेमाल यहाँ करने के लिए इजाजत तो ले ली है न आपने? ही ही ही.
बहुत खूब.

sadhana ने कहा…

आपके इस लाजवाब पोस्ट के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें।

sangeeta ने कहा…

mahfooj ali ji,

aapka ye lekh padh kar aankhen khul gayin....is jaankaari ke liye jitna bhi dhanywad diya jaye kam hai....aapki uplabdhiyon ke liye aapko bahut bahut badhai...aage bhi aisi gyaan ki baaten padhane ko milati rahengi....shubhkamnayen...fir milenge

lucky ने कहा…

बहुत खुब महफूज भाई, क्या कहें आपके इस पोस्ट के बारें मे, शब्द कम पड़ रहे है। आप अपने लेख के माध्यम से हमे जागरुक करने का काम कर रहें है बहुत-बहुत बधाई । और साथ ही हमें ये भी जानने को मिल रहा है कि अंग्रेज तो चले गये लेकिन उन्होने हमे अब भी मानसिक रुप से गुलाम बनाये रखा है। आपके इस लाजवाब पोस्ट के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें।

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