शुक्रवार, 9 जनवरी 2009



मेरे बचपन को याद नही है वो मैदान,


जहाँ मैं पतंग उडाने की कोशिश किया करता था,


और


साथ में माँ भी होती थी......................


मेरे बचपन को याद नही है वो मैदान।


पर


वो मैदान अब भी है,


उसी जगह,


लेकिन!


अब माँ नही है॥





महफूज़ अली


1 टिप्पणियाँ:

अखिलेश शुक्ल ने कहा…

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