मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

एक नज़ारा बार डांस क्लब का.....????


उस गीत पर एक ज़ोरदार

ठुमके लगाती एक हसीन डांसर

कोई होंठों से अपनी

बत्तीसी दबाये हसीना

के हर ठुमके को निहार रहा है,

तो कोई ताल मिलाने की कोशिश

कर रहा है।

किसी की इस हसीना के लिए कुछ

ज़्यादा ही 'दिलदारी' है,

इसलिए अपने घर के

ज़रूरी खर्चे को रोक कर

हसीना पर नोट लुटा रहा है॥

महफूज़ अली

1 टिप्पणियाँ:

Unknown ने कहा…

very nice poem dear though i dont understand much except about a dance bar. Well if you have made someone happy then i think it was worth throwing that unwanted money
well done Mahfooz
good write----10 anjali

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