सोमवार, 18 मई 2009

लेकिन, अब ? ? ? ? ? ? ? ?


बहुत पहले

ऐसा होता था

आदि काल में

शैतान पहचान लिया जाता था

भेष-भूषा और बोल-चाल से॥

लेकिन


अब ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?







महफूज़ अली

5 टिप्पणियाँ:

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

अब तो इन्सान पहचाने जाते है... शायेद किसी-किसी जगह दिखते हैं ...

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ ने कहा…

महफूज़ भाई आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर स्वच्छसन्देश.ब्लॉगस्पॉट.कॉम पर

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

waah bahut khoob likha ,
pahchane to aaj bhi jaate he, ye jo apni dilli he na..vnha ek sansad hoti he,,bas vnhi milenge/

anju ने कहा…

now there are more shaitans than
before,
so its gonna be more difficult
hai na
whatever a nice introspective poem
++10 anjai

shikha varshney ने कहा…

tooooooooooooooo goooooooooood

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