गुरुवार, 11 जून 2009

माँ कि मौत.....


कोई लक्षण नहीं जीवन का

न कोई शब्द,

आहों का अंश भी नहीं

बंद आँखें ........

मैं असमंजस में था कि,

उन्होंने अलविदा भी नहीं कहा..........

यह कैसा मज़ाक है?

हम गले भी नहीं मिले

और उन्होंने आज मरने का दिन चुना

मैं सिर्फ़ एक पल के लिए जिया,

अलविदा कहने के लिए॥








महफूज़ अली

3 टिप्पणियाँ:

अनिल कान्त : ने कहा…

mere pass shabd nahi hain kahne ko

raj ने कहा…

boht dard hai ....jo banta bhi nahi ja sakta...

anju ने कहा…

muje yeh padke rona aaya
bahut khub
ma to ma hai uske jaisa koyee nahi
duniya mein unkee jagah koyee le nahi sakthi---------apni biwi bee nahi le sakti
A++++ anjali

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