रविवार, 5 जुलाई 2009

अब कभी झगडा नही करूंगा.. ...... ...... promise

अभी मेरे मन् में

एक ख़याल आया

की

ज़िन्दगी भर

मैंने ख़ुद को लाचार पाया?

लोगों ने अपना बन के मुझे कितना सताया ?

लेकिन आज तुमने मुझे उम्मीद का सहारा दिया ........

मेरे झगडे और कड़वे बोल को हंस कर पिया

मैं जानता हूँ की मेरी वजह से

तुम्हारे मन् में एक तूफ़ान उठा है

और तुम्हारा दिल टूटा है ! ! !

फिर भी उदासी तुम्हारे चेहरे पर न आई

और

तुम मेरी हर बात पे मुस्कुराई

ठेस लगने पर भी तुम्हारा मन् न रो पाया

और अपने आंसुओं को बड़ी सफाई से छुपाया .....

अभी बंद करता हूँ मैं यह पाती

इस उम्मीद के साथ

की

काले बादल अब छट गए हैं

और

अब रंगों की बहार आएगी ही आएगी................

महफूज़ अली

(मुझे न गुस्सा मत दिलाया करो....... )

9 टिप्पणियाँ:

raj ने कहा…

dil tutne se dil to roya hoga magar usne tumse chhupaya hoga....ansu chupke se chuupa ke tumse bhaya hoga....umeed rakhni chiye rango ki ...or yakeen mano bhaar jaroor ayegi..

विवेक सिंह ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !

rukhsar ने कहा…

gussey pe control rakhiye.

rukhsar ने कहा…

ye promise khud se kariye

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति!!

अल्पना वर्मा ने कहा…

पछतावा मगर सकारात्मक सोच दर्शाती कविता.

Sheena ने कहा…

bahut hi sundar likha hai...

Babli ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया और शानदार रचना लिखा है आपने!

'अदा' ने कहा…

महफूज़ साहब,
आपकी कवितायेँ आपके दिल से निकलती हैं..न कोई बनावट न कोई लगावात...
इस कविता से मैं बहुत प्रभावित हुई हूँ ..
इंसानी जज़्बों को बा-खूबी आपने पेश किया है......शायद इसलिए कि इनको दिल से जिया है ....

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