बुधवार, 12 अगस्त 2009

ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं......


ढल जाती है जब शाम
तब तुम बहुत याद आती हो ,
देखता हूँ तुम्हारे दिए हुए फूलों को अब भी
जो सूखे से अब नज़र आते हैं ..........
तुम्हारे जाने से
कुछ खोता जा रहा हूँ ,
भरी भीड़ में भी अकेला
होता जा रहा हूँ.....................
चला जाता हूँ नींद के आगोशी में
करते हुए याद तुम्हें ,
तुम आती हो
ख़्वाबों में
और चली भी जाती हो ख़ामोशी से.......
आज फिर सुबह हुई है
तुम्हारे दिए हुए फूलों की

माला पिरोई है।
अब थोडी ही देर में
शाम हो जाएगी
इन सूखे हुए फूलों में थोड़ी और
महक आ जाएगी।
तुम आईं थीं मेरी ज़िन्दगी में
बारिश की तरह ,
खिल उठता था तब
मैं तुम्हें देख ,
उन्हीं फूलों की तरह ........
लौट आओ
मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ
ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं
दिखाना चाहता हूँ॥ ॥ ॥ ॥



पेश है एक और प्रेम कविता.......... see disclaimer below...............in the footer

20 टिप्पणियाँ:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

sundar
saumya
sahaj
_______pyaari kavita
__badhaai !

nidhitrivedi28 ने कहा…

Hey,
It's Different & Good...
pyar ki koee bhi nishani kabhi bhi sukhati nahi hai...

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना ।्बधाई।

mehek ने कहा…

उन्हीं फूलों की तरह ........
लौट आओ
मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ
ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं
दिखाना चाहता हूँ॥ ॥ ॥ ॥
sunder pyar ki abhivyakti,bahut sunder,badhai

M VERMA ने कहा…

ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं......
इन फूलो की ताज़गी बरकरार रखियेगा.
बहुत सुन्दर रचना ने एक बार फिर मन मोह लिया

रज़िया "राज़" ने कहा…

दिल की गहेराइ से निकली ये रचना ने अकेलेपन की सारी सीमाएं बांधलीं। अतिसुंदर

ओम आर्य ने कहा…

waah kya baat hai ye sukhe pool aaj bhi taza hai dikhana chahata hu .......bahut hi bhawmay rachana .....padhakar moun me hoo .........our kya kahu .......

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

mahfooz bahi ,

main kuch kahun ya na kahun , isi soch me hoon .. yaar aap na kabhi kabhi khamosh kar dete hai apni kavitao ke dwara... ab to lagta hai ki lucknow aana hi padhenga ji ....

namaskar.

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

इन्हीं फूलों की तरह सुन्दर अभिव्यक्ति !!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

sukhe phulon ki taazgi kuch alag si hoti hai

raj ने कहा…

udas sham ki subh na jane kyun udas hi hoti hai...hum log smander se bichhde hue sahil hai..es paar bhi tanhayee,us paar bhi tanhayee....sukhe hue phoolo ke jariye dil ka haal kahti kavita...aapke ahsaso ko khud pe sahti kavita...

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

बेहतरीन रचना है बहुत पसंद आयी

shama ने कहा…

दुआ करती हूँ , कि , ये फूल हमेशा ताज़े रहें ..!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://lalitlekh.blogspot.com

http://fiberart-thelightbyalonelypath.blogspot.com

परमजीत बाली ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Babli ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

'अदा' ने कहा…

लौट आओ
मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ
ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं
दिखाना चाहता हूँ॥
कुछ फूल कभी नहीं सूखते, क्योंकि दिल में बस जाते हैं और उनकी खुसबू धमनियों में समां कर दौड़ती है और साँसों को सराबोर कर जाती है...
प्रेमाभिव्यक्ति की एक असरदार कविता, जिसने इतनी बातें मुझसे कहवा दीं...
बधाई..

Reetika ने कहा…

har mulakaat ka anjaam judaai kyunhai, ab to har waqt yahi baat sataati hai humein !!

संजय भास्कर ने कहा…

उन्हीं फूलों की तरह ........
लौट आओ
मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ
ये सूखे फूल आज भी ताज़ा हैं

संजय भास्कर ने कहा…

बेहतरीन रचना है बहुत पसंद आयी

सुमन'मीत' ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..............यादों के फूल हमेशा ताजा ही रहते हैं .............

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