मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी, मत छोड़ो साथ मेरा कि आँसू भी साथ न निभा पायें .....



अहसास साथ हैं,
हर पल
हर वक्त
पर ऐसा लगता है
की
खोया हुआ सा है कुछ।
नही हो तुम मेरी कल्पना
हो तुम मेरा यथार्थ
ख़ुद राह मैं तलाशूंगा
जब तुम दोगी
मेरा साथ।
मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,
मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।
मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,
मुस्कान भी रूठ जाए ,
और ........................
आंसू भी साथ न निभा पाए ।।

87 टिप्पणियाँ:

shikha varshney ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

ek possitive khyal...behad khubsurat...
मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को
esa to ho hi nahi sakta ki koi mahfooz saheb ki lau bhujha jaye ..... bahut hi pyaara likha hai dil se..badhai aapko.....।

'अदा' ने कहा…

अहसासों से लबरेज कविता है आपकी.....
दिल की बात तो कोई आपसे कहना सीखे
कितनी आसानी से कह जाते हैं आप सबकुछ और हम पाठक ठगे से रह जाते हैं...पढ़ते !!!
बहुत सुन्दर है आपकी कविता...
हमेशा की तरह.....!!!

अनिल कान्त : ने कहा…

aane bahut dil se likha hai
sadaiv ki tarah khoobsurat

राजीव तनेजा ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए....
अमा यार...नुकसान करना तो कोई तुमसे सीखे...
एक तरफ तो कहते हो कि बुखार की वजह से रजाई में पड़ा हुआ हूँ और फिर इस आफत को बुला रहे हो अपने पास...

रजाई की कोई चिंता है कि नहीं?...
:-)

सुन्दर...दिल से निकली हुई कविता

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत हीं सुन्दर भाव अभिव्यक्ति भैया ।

शरद कोकास ने कहा…

हवा का झोंका एक यथार्थ है उसे तो आना ही आना है । बचके रहना पंखे की और ए.सी की दोनो से । .. वैसे यह चित्र बढिया है तुम्हारा तो नही.. ज़रा सर तो उठाना ..देखूँ ।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

महफूज़ भाई, ये बुखार का असर है या रजाई का.
इतनी गर्मागर्म कविता लिखी है.

अति सुन्दर.

Apoorv ने कहा…

बहुत कातर सी मगर पुरकशिश आरजू है आपकी यह कविता..पहले तो रियलिज्म को स्वर देती हुई और विश्वास से परिपूर्ण शुरू होती है जब आप यह लिखते हैं
नही हो तुम मेरी कल्पना
हो तुम मेरा यथार्थ
ख़ुद राह मैं तलाशूंगा
मगर फिर यह एक बेचैन पुकार बन जाती है

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

और फिर एक अनागत डर की भंवर मे फ़ंसने सी लगती है

मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,

आपकी यह कविता अकेलेपन के किसी गहरे दश्त मे खो गये किसी व्याकुल मन की चीख सी सुनाई देती है मुझे..
ऐसे ही किसी वक्त मे साहिर साहब लिख गये होंगे..
अपने सीने से लगाये हुए उम्मीद की लाश
मुद्दतों ज़ीस्त को नाशाद किया है मैने.
..बधाई!!!

M VERMA ने कहा…

हर हवा के झोके के साथ एहसास की लौ बढती है बुझती नही है. एहसास और विश्वास साथ रखिये. दिल को (जो आपके ब्लोग पर आने के बाद कर्सर से जुडा आपका दिल है) इतना तेज मत धडकने दीजिए.
बहुत अच्छी रचना लिखी है. बुखार उतरा या नही?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।
आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

kshama ने कहा…

खुदा करे आपकी आँख कभी नम ना हो, और हँसी के फ़व्वारे ही किस्मत में हों!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

अति सुन्दर.

MANOJ KUMAR ने कहा…

भावावेग की स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वाभाविक परिणति दीखती है।

Arvind Mishra ने कहा…

महीन अहसासों की सुन्दर अभिवयक्ति !

अजय कुमार झा ने कहा…

महफ़ूज़ भाई
खुदा आपकी लेखनी को महफ़ूज़ रखे..और चाहे कोई कितना ही अकेला तन्हा छोड दे ..हम साथ निभाएंगे....माना कि मेहबूबा न सही ...मेहबूब तो बन ही सकते हैं ...क्या कहूं इससे ज्यादा

pragya ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,जो बुझा जाये मेरी लौ को
bahut sunder manodhaaw diye hain aapne . badhaayi

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही कशिश भरा आग्रह है कविता में ...
मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

हवा के झोंके की तरह नहीं...मंद बयार सी आनी चाहिए जो सुगन्धित कर दे..हर पल हर क्षण

Shefali Pande ने कहा…

very nice poem...

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

अहसास साथ हैं, हर पल हर वक्त पर ऐसा लगता है की खोया हुआ सा है कुछ। नही हो तुम मेरी कल्पना हो तुम....

shandaar....

अम्बरीश अम्बुज ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।
kavita pasand aayi... labels samajh mein nahi aaye!!!

Mishra Pankaj ने कहा…

सुन्दर कविता महफूज जी आज आपका फीड अभी मिला !

वाणी गीत ने कहा…

कविता बहुत अच्छी है ...दिल को छूने वाली ...कल्पना यथार्थ हो जाए ...शुभकामना
छुटकू भैया ...रोना नहीं ...
इत्ते से बुखार से ...!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता लिखी आप ने, ओर आज थोडी फ़ुरसत थी तो आप का परिचय भी पढा... दोनो ही बहुत गर्म.

अमृत पाल सिंह ने कहा…

वाह। मत छोडो मेरा साथ कि आँसू भी ना दे पायें साथ मेरा। अपनी लौ को जलाये रखिये।

manu ने कहा…

अच्छी कोशिश..
बधाई...

manu ने कहा…

maaloom thaa..


ke modiration hat jaayegaa...

:)

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

नही हो तुम मेरी कल्पना
हो तुम मेरा यथार्थ
ख़ुद राह मैं तलाशूंगा
जब तुम दोगी
मेरा साथ
looking confident,Good.

परमजीत बाली ने कहा…

महफूज़ जी,बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति है।बधाई स्वीकारें।

AlbelaKhatri.com ने कहा…

इस अनूठी कविता की प्रशंसा और सारगर्भित आलोचना में यदि मैं 10 पृष्ठ भी लिखूं तो कम होगा लेकिन....इतनी लम्बी विवेचना उनके लिए की जाती है जिन्हें स्वयं की मेधा का पूर्ण भान नहीं होता,,,,,,,,आप जैसे परिपक्व सृजनकार के लिए मेरे पास उपरोक्त कविता के अलंकरण हेतु केवल तीन शब्द हैं ....इन्हें स्वीकार कर लें.....

अद्भुत !
अभिनव !
अद्वितीय !
_____________अभिनन्दन आपका........

Rakesh Kumar ने कहा…

Mahfooz ji,
aapki post pahli baar padhi hai, bahut dil se likhte hain ap. aapka pyar apke saath rahe yahi dua karta hun. bharosa rakhiye apne pyar par. bahut pyari kavita lagi hai apki. safalta milegi aapko, dil se duva hai.

Dipak 'Mashal' ने कहा…

Albela ji ne sab kah diya, main to bas haan me haan milan eaaya hoon ji...
Jai hind...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,

बहुत ही सुन्दर कविता ! भावप्रधान्!
बधाई!!!

अम्बरीश अम्बुज ने कहा…

janmdin mubarak mahfooz bhai..

aapko samarpit ek post..
http://ambarishambuj.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html

'अदा' ने कहा…

महफूज़ जी,
सुना है आपकी तबियत ख़राब है....अरे ऐसा कैसे हो सकता है...!!
आपका हैप्पी बर्थडे है....आप रजाई वगैरह छोडिये और अपने असली फॉर्म में आ जाइए बस....हम कुछ नहीं जानते हैं ......!!

HAAPY BIRTHDAY TO YOU !!
MAY GOOD GOD BLESS YOU !!

ये कुछ बातें आपके लिए :

Your talent is God's gift to you.
What you do with it is your gift back to God.

All men who have achieved great things have been great dreamers.

A champion is someone who gets up,
even when he can't.

You are never given a wish without being given the power to make it come true.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

कितना आग्रही गीत है । किस तरह आना है और किस तरह नही सब लिख दिया है । माफ करना मै मजाक बिलकुल नही करना चाहती ।

Babli ने कहा…

बहुत ही शानदार, ज़बरदस्त और लाजवाब रचना लिखा है आपने ! दिल की गहराई से लिखी हुई और एहसास से भरी इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई !
जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो ! शुभकामनायें !

Udan Tashtari ने कहा…

तुम अकेले कब हो गये..हम हैं न भाई..ऐसा न जज्बाती हो ज्जाओ कि हम रो पड़ें...उम्दा रचना...


वाकई, अरविन्द जी के शब्द कहूँ तो:

महीन अहसासों की सुन्दर अभिवयक्ति


जन्म दिन की हजार बधाई और शुभकामना.

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।
मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,

महफूज़ भाई, कई बार कुछ नायाब शब्दों को पढ़ने के बाद बाकी शब्द नहीं आते उसके रिस्पोंस में.....मै ठीक शब्द नहीं ढूंढ़ पा रहा...पर एक बात ---झोंको को अपने ऊपर भी कंट्रोल नहीं होता ना..उन्हें भी कोई और ही बहा रहा होता है...

Shobhna Choudhary ने कहा…

bahut hi acchi poem likhi hai aapne hamesha ki tarah......vaise jo kisi se pyar karta hai vo use chodta nahi.....agar chodta hai to ya to vo pyar karta hi nahi ya phir uski koi majburi hoti hai....poem kafi dil se likhi hai aapne...

Anil Pusadkar ने कहा…

क्या कहूं सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूं कि आपको पढना बंद करना पड़ेगा क्योंकि पढो तो कुछ कुछ होता है।

प्रकाश पाखी ने कहा…

मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,
मुस्कान भी रूठ जाए ,
और ........................
आंसू भी साथ न निभा पाए ।।
ये पंक्तियाँ गहरा असर छोड़ कर गयी....
दिल से लिखा हमेशा अच्छा होता है....जन्म दिन की बधाई स्वीकार करें!

जी.के. अवधिया ने कहा…

अति सुन्दर अभिव्यक्ति!

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है ...

sangeeta ने कहा…

हो तुम मेरा यथार्थ
ख़ुद राह मैं तलाशूंगा
जब तुम दोगी
मेरा साथ।
bahut khoob..yatharth maanate hain to saath bhi aapko zaroor milega...

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।
bahut khoobsurat abhivyakti...bahut sundar kavita...badhai

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

sabse pahale to janmdin ki bahut bahut badhayi...usake baad main aapki kavita par aata hoon bhai main kya kahu mujhe to pahunchane me der ho gayi itane logo ki gawahi hi bata rahi hai ki aap kya cheez hai..specially mai kahun to mujhe yah kavita bahut hi sundar lagi....bas bhai likhate rahiye...ham sab aap ke lekhani ke kayal hai..dhanywaad

Meenu Khare ने कहा…

सुन्दर कविता.

संजय भास्कर ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए....
अमा यार...नुकसान करना तो कोई तुमसे सीखे...



बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर ने कहा…

क्या कहूं सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूं कि आपको पढना बंद करना पड़ेगा क्योंकि पढो तो कुछ कुछ होता है।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर है आपकी कविता...

sada ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

बेहद खूबसूरत शब्‍द रचना, बेहतरीन प्रस्‍तुति, बधाई ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,

बहुत khoob mahfooz जी ......... बहुत kamaal ka likha है ...... sach mein jeevan ke safar mein kisi ka saath hona बहुत jaroori hota है ........

Darpan Sah ने कहा…

Janm Din ki hardik Shubhkaamnaiyen !!

Office main gmail ya blogger main login nahi kar pa raha hoon....

Isliye anyonymus ke liye kshama karein !!

Darapan Sah ने कहा…

Aur haan Pata chala ki swasth kharab hai aapka ...

...Take Good care of Yourself !!

*KHUSHI* ने कहा…

Bahetareen rachana.... dil se nikli hui iss aawaz sun kek ya koi kisiko bhool sakta hain??

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया रचना !!

Murari Pareek ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखते हैं भई आप, इतने दिन आपसे अनजान कैसे रह गया !!! खैर अब आपका सानिध्य प्राप्त हो गया है तो आपसे बहुत कुछ मिलेगा है !!!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।

मन को स्पर्श करती पंक्तियां...

sadhana ने कहा…

[red]

ओ लखनऊ के नवाब
जन्म दिन का हो बधाई
मेरी भी उम्र लग जाये
यही है मेरी प्रभु से दुहाई

अगले साल जब दु बधाई
पायल छनकाती झुनझुन सी
आपके साथ बैठी हो
सुंदर , प्यारी सी लुगाई

ओ लखनऊ के नावाव
जन्म दिन का हो बधाई
मेरी भी उम्र लग जाये
यही है मेरी प्रभु से दुहाई

sadhana ने कहा…

bahut ki sunder poem..........

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

नही हो तुम मेरी कल्पना
हो तुम मेरा यथार्थ

सब कुछ इतना जल्दी............ कब और कैसे??????????????

हाँ और आपको आपके जन्म-दिन की हार्दिक बधाई.............

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

रचना दीक्षित ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।
मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,
मुस्कान भी रूठ जाए ,
वाह महफूज़ भाई बहुत खूब लिखा है कुछ पंक्तियाँ तो ऐसी हैं जिन्हें बार बार पढने को दिल करता है
रचना

वन्दना ने कहा…

bAhut hi sundar bhavon se saji rachna.........badhayi

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत ही सुन्दर लगी आपकी यह रचना जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई आपको

seema gupta ने कहा…

beautifully well composed bunch of soft feelings ya.... Wish u many happy returns of the day. Regards

रश्मि प्रभा... ने कहा…

प्यार की अनगिनत लहरें,अनगिनत एहसासों को पिरोये हुए है .........
बहुत दिलकश

singhsdm ने कहा…

मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,
मुस्कान भी रूठ जाए ,
और ........................
आंसू भी साथ न निभा पाए ।।
fantastic.......

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

इश्क-ए-मजाजी का तजुर्बा अच्छा है |

good... cong...

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव है !!

Pandit Kishore Ji ने कहा…

ek bhavpurn sundar kavita
aapko janmdin ki badhai

रंजना ने कहा…

मत आओ एक हवा के झोंके की तरह
मेरी ज़िन्दगी में ,
जो बुझा जाये मेरी लौ को।

Kya baat kahi aapne...waah !!

Bahut hi bhaavpoorn sundar rachna...jo dil se nikal dil ko chhone me samarth hai.

Vinay Prajapati ने कहा…

aur kya kamaal hai, gajab dhaa rahe hain...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

आंसू भी साथ न निभा पाए!

दोस्तों के रहते इतने फिक्रमंद न हो भाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ओम आर्य ने कहा…

मुझे मालुम था तेरे मिजाज के बारे में,
मैं न आया मैं जरा उदास सा था

Om ने कहा…

एक गुलदस्ता फूलों का
जिसमें शुभकामनाओं की पंखुरियां
और बधाइयों के पत्ते हों
और जिसमे से दुखों के सारे कांटे तोड़ दिए गए हों, भेज रहा हूँ....

जन्म दिन पर !

sandhyagupta ने कहा…

Sundar aur bhavpurn abhivyakti.Badhai.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... sundar rachanaa !!!!!

डा० अमर कुमार ने कहा…


माशाल्लाह, बहुत उम्दा पयाम !

ज़मीनो आस्माँ के नूर तुम थोड़ा सा उज़ाला दे
हमारे वास्ते काफी न रही अब रोशनी अपनी

सतीश पंचम ने कहा…

मन के गहन भावों को बखूबी व्यक्त करती सुंदर रचना। बहुत खूब।

बेनामी ने कहा…

aap bahut hi achchaa likhte hain sir

sabhi to kah rahe hain

Nirmla Kapila ने कहा…

मत छोडो अकेला मुझे,
एक ऐसे मोड़ पे ,
जहाँ वक़्त भी मेरा साथ न दे पाए ,
मुस्कान भी रूठ जाए ,
और ........................
आंसू भी साथ न निभा पाए ।।
laajavaab is par to maine kal comment diyaa tha kahan gaya? bahut sundar kavita hai badhaai aasheervaad

Yugal Mehra ने कहा…

पडकर अच्छा लगा।

Amit K Sagar ने कहा…

इक दिल की सच्ची रचना. बहुत ही खूबसूरत अहसास.
--

अंतिम पढ़ाव पर- हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

raj ने कहा…

bahut hi gahre ehsaas ke saath likhi hai yeh kavita .........मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,....

shabnam khan ने कहा…

Bohot khoob kavita likhte ha mehfooz ji.....
Ehsas ko shabdo me piro kar ek behad khoobsurat rachna kar dali ha aapne......

Suman ने कहा…

nice

"लोकेन्द्र" ने कहा…

राज की बात थी ये.......

tejaswini ने कहा…

bahut dil se likhi kavita hai/
jaise mere liye likhi hai kisi ne
sunder/ati sunder

ज्योति सिंह ने कहा…

मुझे हर पल ज़रुरत है तुम्हारी,
जलते रहने के लिए,
धड़कते रहने के लिए,
poori rachna behtrin ,ada ji bilkul sahi kah gayi .

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