गुरुवार, 6 अगस्त 2009


मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ

इसीलिए ख़ामोश हूँ ,

मैंने तुम्हे प्यार किया शिद्दत से

आख़िर तक........


पर अब मैं ख़ामोश हूँ

क्यूंकि मेरी आवाज़ तुम थीं

जिसने मुझे खो दिया है।

पर

मैंने कुछ प्यार संजो कर रख लिया है

अपने ख़्वाबों की पोटली में..............


एक दिन तुम

सुनोगी मेरी ख़ामोशी को

और

देखोगी मुझे पूछती निगाहों से कि

"क्या तुम मुझे इतना प्यार करते थे"?

.

.

और मैं कुछ कह न सकूंगा॥




महफूज़ अली

११.३३

33 टिप्पणियाँ:

ओम आर्य ने कहा…

waah ......kya baat hai ....jawaab nahi antim panktiyo ka......badhaaee

chandan ने कहा…

behtarin wakai

Udan Tashtari ने कहा…

रचना हमेशा की तरह उम्दा और चित्र संकलन मोहित करता है. बधाई.

M VERMA ने कहा…

कमाल का -
खामोशी को सुनाने की अद्भुत अदा
बेहतरीन्

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

बहुत सम्वेदनशील लिखा है !!!
Interesting !!!

raj ने कहा…

kuch na kahna bhi apne aap me boht kuch kah deta hai...khamoshio ki bhi zuban hoti hai...

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

सचमुच कमाल की रचना है
---
विज्ञान पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

खूबसूरत एहसास .....

rukhsar ने कहा…

again a nice piece, very sensetive . this poem shows how much caring and emotionalyou are. but get out of/from the past.

अर्चना तिवारी ने कहा…

सचमुच बेहतरीन् रचना...

Sonalika ने कहा…

और मैं कुछ कह न सकूंगा॥

सच है खामोशी अक्‍सर वह कह जाती है जो शब्‍दों में समेटा नहीं जा सकता है।

खूबसूरत रचना

अर्शिया अली ने कहा…

Ati sundar.
{ Treasurer-T & S }

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

mahfooz bhai , kahne sunne ki hado se bahar hai koi bhi pyaar ....

aur last me to aapne gazab dha diya hai sir ji ...

badhai ho

vijay

Dimps ने कहा…

Very nicely composed and designed.
Keep it up!!! Take care

Regards,
Dimple
http://poemshub.blogspot.com

दिगम्बर नासवा ने कहा…

LAJAWAAB HAI AAPKI RACHNA.........KHAAMOSHI KI JUBAAN KAHTI HAI ITNA PYAR KYON KARTE HO.....UMDAA.......

amarjeet kaunke ने कहा…

pyar k ahsaason se labrez bahut khubsurt kavitaen....dr.amarjeet kaunke

महफूज़ अली ने कहा…

Main aap sabka tahe dil se shukrguzaar hoon, jo meri kavitaon ko itna pyar aur izzat bakshi...........

rohitler ने कहा…

beautiful.....

Babli ने कहा…

इस ख़ूबसूरत, लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ! तस्वीर भी बहुत सुंदर है!

'अदा' ने कहा…

एक दिन तुम


सुनोगी मेरी ख़ामोशी को


और


देखोगी मुझे पूछती निगाहों से कि


"क्या तुम मुझे इतना प्यार करते थे"?


.


.


और मैं कुछ कह न सकूंगा॥

Mahfooz sahab,
Aji...kahne ki kya zaroorat bhala !!!
aapki khamoshi hi gunguna uthegi..
la la la la.....

वीरेन्द्र वत्स ने कहा…

mahfooz bhai,

aap dil se kaam lete hain,
quayamat hai....

aap dil ki gahraiyon me utar kar likhte hain. achchha laga.

सर्वत एम० ने कहा…

सम्वेदना और एहसास ही कविता/शायरी को जन्म देते हैं. आपकी कविता इन दोनों से लबरेज़ है. इस खूबसूरत पोयम के लिए मुबारकबाद.

अर्शिया ने कहा…

सुंदर भावनाएं, शानदार अभिव्यक्ति।
( Treasurer-S. T. )

Jyoti Verma ने कहा…

nice !!!!
ek gazab ka ahsaas hai apkajo maan ko chhu gaya....

Dr. kavita 'kiran' (poetess) ने कहा…

aadab mahfooz sahab!
mere blog per dastak dene ka shukriya.umeed karti hun aage bhi tashreef late rahenge.aapki kalam bhi bahut pukhta hai.badhai.

रचना दीक्षित ने कहा…

और मैं कुछ कह न सकूंगा॥
बहुत भावुक कर गयी आपकी ये कृति
बहुत सुंदर प्यार के अहसासों से सराबोर प्रस्तुती

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

bhaavnaatmak abhivyakti ke liye badhaai.
- vijay tiwari 'kislay '
http://hindisahityasangam.blogspot.com/

डॉ.पदमजा शर्मा ने कहा…

महफूज जी
ख्वाबों की पोटली सदा साथ रहे .यही दुआ है .

समयचक्र ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट. हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में प्रभावी योगदान के लिए आभार
आपको और आपके परिजनों मित्रो को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये...

jenny shabnam ने कहा…

mehfooz sahab,
aapko pahli baar padh rahi hun. ek baar mein hin aapki 5 nazm padh gai. sahaj saral shabdon mein atyant bhaawpurn rachayen jo man ki atal gahraaiyon se likhi gai hain seedhe mann ko chhu gayee.
kuchh lafz khaamoshi odhkar jyada mukhrit ho jate hain. bahut badhai aur shubhkaamnaayen.

आनन्‍द पाण्‍डेय ने कहा…

आंखें भर आई आपकी ये रचना पढकर


सच है कवि की कल्‍पना का कोई तोड नहीं।

धन्‍यवाद

Dr. kavita 'kiran' (poetess) ने कहा…

मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ
इसीलिए ख़ामोश हूँ ..bahut sunder rachna..
...aap mere blog per aaye... mri rachna ko saraha shukriya..:))

आशा जोगळेकर ने कहा…

कैसी ये बेरुखी कि इस बात को सुनना पडे कि क्या सचमुचइतना प्यार करते थे ।

आपकी लेखनी पर आपने कमेंटस का प्रावधान क्यूं हटा दिया ।

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