
तुम्हारे साथ गुज़ारे हुए ,
उन लम्हों कि याद
आज फिर मुझे
आई है।
पल भी वही हैं,
नज़रें भी
और
नज़ारे भी वही हैं...
नहीं हैं अगर कोई
तो बस तुम..........
तुम्हें उन वादों ,
उन वफ़ाओं कि कसम
बस एक बार,
सिर्फ़ एक बार........
एक पल के लिए
चली आओ
उस पल में तमाम
उम्र जी लेंगे हम॥
महफूज़ अली
(मैं अपने तमाम पाठकों के e . mails और टिप्पनिओं का बहुत शुक्रगुजार हूँ , जो आप सबने मेरी प्रेम रस की कवितओं को सराहा... दरअसल प्रेम रस एक ऐसा विषय है जिसके लिए हमारी फीलिंग्स कभी कम नहीं होतीं..... और हम सब प्रेम के उस दौर से गुज़र चुके होते हैं ......... मैं दोबारा आप सबका शुक्रगुजार हूँ....... आगे भी मेरी प्रेम रस की कविताओं को ऐसे ही सराहते रहें .......... धन्यवाद.........)
04 /08/2009
21.17
18 टिप्पणियाँ:
बेहतरीन आह्वान
भावात्मक अभिव्यक्ति..... वाह.. साधुवाद स्वीकारें..
बेहतरीन भाव!!
boht khoobsurat...wo jaroor aye...
शानदार अभिवयक्ति. रूहानियत का एहसास ....आभार
अच्छी रचना है. ख़ुदा 'महफ़ूज़' रक्खे हर बला से हर बला से.
waah bahutkhub,ek pal ki tho zindagi hai.
Bahut sundar..!Kitnee saralta se ek sada nikli hai..!
Aapka link shefalee pande ji ke blog pe dee gayi tippanee se mila..
सच कहा दोस्त............ umr jeene के लिए एक lamhaa ही kaafi है............. lajawaab लिखा है
अवश्य आएँगी........इतनी प्यारी पुकार सुनकर
bahut hi sundar ......jawaab nahi hai har ek panktiyo ka...........atisundar
वाह!क्या खुब अंदाज़े बयाँ है आपका।
उस पल में तमाम
उम्र जी लेंगे हम॥
बहुत खूबसूरत रचना दिल को छू लेने वाली कोमल ...
अत्यन्त सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना बहुत अच्छी लगी! तस्वीर भी बहुत सुंदर और प्यारी है!
apne kamaal kar diya hai.
pr ye bata dijiye ki ye kiske leye likhi hai?????
bahut sundar .........
aap sabke pyar ne mujhe phir ek prem ras ki kavita likhne ko majboor kar diya......
Dhanyawaad..... aap sabko....
jai ho jai ho
yaar us pal ki umr 100 baras ki hoti hai ,jab hamara mehboob hamare saath hota hai ...
badhai
vijay
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