गुरुवार, 7 मई 2009

कल्पना

कल्पना

धरती के नीचे आकाश में,
चमक रहे थे तारे,
और तैर रहे थे द्वीप,
उग रहे थे बीज,
खिल रही थीं कलियाँ,
लावा और डायनासौर की हड्डियाँ।।



महफूज़ अली

2 टिप्पणियाँ:

*KHUSHI* ने कहा…

laajawaab kalpna..

anju ने कहा…

awhhhhh
what thoughts of nature
with earth the sky and the
stars and ofcourse the bones
of the dinausaurs to give you
company
good write
anjali

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