गुरुवार, 27 अगस्त 2009

जब से तुमसे प्यार हुआ ? ? ? ?


जब से तुमसे प्यार हुआ,

दिल की धड़कन खो गई।


तुम्हारी पायल देख मन हुआ घायल,

और हर घुँघरू से दिल्लगी हो गई।


कल तक तो थी बेज़ार ज़िन्दगी ,

आज लगा ईद हो गई।


अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,

आज अचानक जीत हो गई॥








(See DISCLAIMER below in the footer....... )

18 टिप्पणियाँ:

M VERMA ने कहा…

प्यार खुद धडकन होती है यह खो नही सकती. हार के बाद मिली जीत ही तो दिल की मिल्कियत होती है.
विरोधाभास कविता की खूबसूरती है.
इस जीत के लिये बधाई.

'अदा' ने कहा…

जब से तुमसे प्यार हुआ,

दिल की धड़कन खो गई।

तुम्हारी पायल देख मन हुआ घायल,

और हर घुँघरू से दिल्लगी हो गई।

कल तक तो थी बेज़ार ज़िन्दगी ,

आज लगा ईद हो गई।

अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,

आज अचानक जीत हो गई॥

अजी,
ये क्या कह दिया आपने...
पढ़ कर ...
हमारे पायल छनकने लगे हैं
और हमारी भी ईद हो गयी है.
गज़ब ढाया है जी आपकी लेखनी ने....

'अदा' ने कहा…

महफूज़ साहब,
आपकी कवितायेँ आपके दिल से निकलती हैं..न कोई बनावट न कोई लगावात...
इस कविता से मैं बहुत प्रभावित हुई हूँ ..
इंसानी जज़्बों को बा-खूबी आपने पेश किया है......शायद इसलिए कि इनको दिल से जिया है ....

P.S. Aapki photo bhi bahut sundar hai ji.....hehehehehe

Mithilesh dubey ने कहा…

वाह महफूज जी क्या बात है, लाजवाब रचना। दिल को छू लेने वाली रचना के लिए आभार..................

परमजीत बाली ने कहा…

सुन्दर गीत है बधाई।

Udan Tashtari ने कहा…

अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,
आज अचानक जीत हो गई॥


-वाह! सुन्दर!! बधाई!

raj ने कहा…

dhadkan kho gyee,man hua ghayal...pata nahi kya kahun ab?pahle socha comment nahi kartee.main jyada kuchh nahi kahna chahti na hi khud ko kuch samjhtee hun..personally mujhe ye apke level ki nahi lagi....

सुरेन्द्र Verma ने कहा…

BHAI AAPKE KHAYAL KO EK HASINA HI SAMAJH SAKTI HAI PAR UNHE PAIRON KEE JUTI KABHI NA KAHNA

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

क्या बात है

vikram7 ने कहा…

कल तक तो थी बेज़ार ज़िन्दगी ,
आज लगा ईद हो गई।
वाह... सुन्दर रचना

रज़िया "राज़" ने कहा…

अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,
आज अचानक जीत हो गई॥
वाह! क्या बात है!!!

rukhsar ने कहा…

poem to achchee hai, lekein aesa lagta hai jaese kisi roadside romeo ne likhi hae, very downmarket poem yu ve written ever.

rukhsar ने कहा…

Sorry for writing all these , but true.

Ashok Pandey ने कहा…

तुम्हारी पायल देख मन हुआ घायल,
और हर घुँघरू से दिल्लगी हो गई।

बहुत खूब...सुंदर रचना।
देसी एडीटर
खेती-बाड़ी

M.A.Sharma "सेहर" ने कहा…

अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,
आज अचानक जीत हो गई॥
खूब लिखा !!

अहसासों की भी कितनी ज़रूरत होती है ज़िन्दगी में....
यथार्थ अभिव्यक्ति !!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah

sadhana ने कहा…

achhi hai .par....... aap jaise likhte hai waisi nahi hai.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कल तक तो थी बेज़ार ज़िन्दगी ,
आज लगा ईद हो गई।

vaah क्या बात है janaab ......... किसी के आने का fark भी क्या kamaal करता है ........

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