गुरुवार, 27 अगस्त 2009

जब से तुमसे प्यार हुआ ? ? ? ?


जब से तुमसे प्यार हुआ,

दिल की धड़कन खो गई।


तुम्हारी पायल देख मन हुआ घायल,

और हर घुँघरू से दिल्लगी हो गई।


कल तक तो थी बेज़ार ज़िन्दगी ,

आज लगा ईद हो गई।


अब तक तो था 'महफूज़' हारा-हारा ,

आज अचानक जीत हो गई॥








(See DISCLAIMER below in the footer....... )

सोमवार, 24 अगस्त 2009

वो पल आधा मेरा होगा और आधा ?????


तुम मेरे संग एक पल बाँट लो,

वो पल आधा मेरा होगा

और

आधा तुम्हारे दुपट्टे की गाँठ में,

छोटा बच्चा बन के जो खेलेगा मेरे संग

तुम्हारी खुश्बू लिए ।


तुम एक ऐसा ख़्वाब बुन लो,

बता जाए जो बात तुम्हारे मन की

मेरे पास आ कर चुपके से ......

तुम जब सोती होगी भोली बन के

तो वो ख़्वाब खेलता होगा मेरी आँखों में॥


तुम वो रंग आज मुझे ला दो,

जो मुझे दिखाए थे

बादलों के झुरमुट के पीछे

झलकते आसमान के॥


तुम वो बूँद रख लो संभाल कर,

मेरी आँखों के भ्रम में ,

जिसने बसाया था डेरा

तुम्हारी आँखों में.........

उस खारे बूँद में ढूँढ लेना

कुछ ख़ूबसूरत पल मेरी यादों के,

मेरी बातों के॥


शनिवार, 22 अगस्त 2009

कुछ हिन्दी हाइकू कवितायें!!!


१। गर्मी से प्यासा सूरज,

बादलों से करता बातें,

मानसून अभी नही आया?॥

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२। जर्ज़र काया की मेरी कामवाली,

कहती नही छोडूंगी आपका घर,

क्यूंकि पेट नही तो भेंट नहीं॥

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३। सुनो! तुम रोना मत,

मुझे काफ़ी आगे जाना है, मैं लौटूंगा...

मैंने ऐसा तो नही कहा॥

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४। लाल सूरज उगता ऊँचा, ऊँचा......

निष्फल पेड़ों से भी ऊँचा,

खड़ा निड़र, मुहँ चिढाता॥

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५। नदिया बहती कल-कल ,

लादे पीठ पर कोहरा

और पेट में बर्फ॥

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(हाइकू कविता लिखने की जापानी विधि है, जिसे हम 5-7-5 के Syllables में लिखते हैं, हिन्दी में लिखने के लिए कोई ज़रूरी नही है की हम Syllables को फोल्लो करें.... लेकिन तीन पंक्तियाँ का होना ज़रूरी है..... यह एक कोशिश है.... उम्मीद है की ठीक लगेंगी..... )

गुरुवार, 20 अगस्त 2009

जब भी तुम्हें .......


कविता!!!!!!!!!!!


जब भी तुम्हे लिखता हूँ,

तुम किसी की कहानी बन जाती हो।

जब भी तुम्हें सुनता हूँ,

तुम किसी की ज़ुबानी बन जाती हो।

जब भी तुम्हें पढ़ता हूँ,

तुम किसी की यादें बन जाती हो।

जब भी तुम्हें याद करता हूँ,

तुम कविता बन जाती हो॥

मंगलवार, 18 अगस्त 2009


था दिन आज ही का,
चली गयीं थीं तुम मुझे छोड़ के ,
हमेशा के लिए ...........
फिर कभी न आने के लिए .............
क्या क़ुसूर था मेरा ?


सोच रहा हूँ कि
क्यूँ होता है ऐसा ?
क्या कभी तुमसे मिल पाउँगा?
क्यूँ जो होता है सबसे प्यारा
वो ही होता है दूर हमेशा........?????


हमेशा ही रहेंगीं यह आँखें नम
और
यादें ग़मज़दा ........
तुम आज भी बसी हो मेरी साँसों में
धडकनों में,
क्यूंकि हूँ तो अंश ही तुम्हारा.....


या! ख़ुदा , एक बार मुझपर थोड़ा सा रहम कर दो,
बस एक बार मुझे मेरी माँ से मिला दो !!!!!!!
क्यूंकि यह काम है बस तुम्हारा ही.....
क्या वो तुम्हे भी इतनी पसंद आई ?????


एक ख़्वाहिश है मेरी
बस एक बार जी भर के उन्हें देख लूं
इन तरसती आंखों को थोड़ा सुकून पा लूँ .....
बस मेरी इतनी इल्तिजा है तुमसे
उनका पूरा ख़याल रखना
कभी न आंसू आए उन आंखों में
मुस्कुराए वो हमेशा की तरह ...........
उनको जन्नत बख्शना
और उनकी बगिया में हमेशा ही फूलों को महकाना ......
और अपने लिए बस मांगूं मैं इतना ही.....
हर जनम में बनाना उन्हें ही

"मेरी माँ!!"
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