गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

वो इंसान
ज़रूर अच्छा
होता है
जिसके
हज़ार

दुश्मन
होते
है॥




महफूज़ अली

मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

एक नज़ारा बार डांस क्लब का.....????


उस गीत पर एक ज़ोरदार

ठुमके लगाती एक हसीन डांसर

कोई होंठों से अपनी

बत्तीसी दबाये हसीना

के हर ठुमके को निहार रहा है,

तो कोई ताल मिलाने की कोशिश

कर रहा है।

किसी की इस हसीना के लिए कुछ

ज़्यादा ही 'दिलदारी' है,

इसलिए अपने घर के

ज़रूरी खर्चे को रोक कर

हसीना पर नोट लुटा रहा है॥

महफूज़ अली

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

मैं रह रह कर भूल जाता हूँ
अभी अभी किसका फ़ोन आया था
किसकी पढ़ी थी वो खूबसूरत कविता
कुछ अच्छी सी पंक्तियाँ थीं
पता नहीं...!!!!!!!!!!!!!!

कुछ याद नहीं आ रहा...............




महफूज़ अली

कहते हैं की नींद एक छोटी मौत है,

और

मौत एक लम्बी नींद॥


महफूज़ अली

रविवार, 29 मार्च 2009

हर वक्त॥

खड़ा रहता हूँ अक्सर
ज़िन्दगी के चौराहों पर
अनजाने और पहचाने लोग दौड़ते रहते हैं
हर वक्त॥



महफूज़ अली
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...