सब कुछ भूल उड़ने की चाहत ज़िन्दा रह गई
दबी प्यास के ऊपर बहने लगी एक नदी
हर तरफ़ दिखने लगी घिरती हुई धुंध
घुप अंधेरे में दीवार से टकराते सर भी
कुछ न कर सके
शहर के बीचोबीच गुम हो गया वह चेहरा भी
जो निकला था अपनी पहचान बनाने के लिए॥
महफूज़ अली
सब कुछ भूल उड़ने की चाहत ज़िन्दा रह गई
दबी प्यास के ऊपर बहने लगी एक नदी
हर तरफ़ दिखने लगी घिरती हुई धुंध
घुप अंधेरे में दीवार से टकराते सर भी
कुछ न कर सके
शहर के बीचोबीच गुम हो गया वह चेहरा भी
जो निकला था अपनी पहचान बनाने के लिए॥
महफूज़ अली
उस गीत पर एक ज़ोरदार
ठुमके लगाती एक हसीन डांसर
कोई होंठों से अपनी
बत्तीसी दबाये हसीना
के हर ठुमके को निहार रहा है,
तो कोई ताल मिलाने की कोशिश
कर रहा है।
किसी की इस हसीना के लिए कुछ
ज़्यादा ही 'दिलदारी' है,
इसलिए अपने घर के
ज़रूरी खर्चे को रोक कर
हसीना पर नोट लुटा रहा है॥
महफूज़ अली