मंगलवार, 9 जून 2009

दूर देश से आते बादल, न जाने कुछ कह जाते हैं.. ...... ...



ये छोटे छोटे पल न जाने क्यूँ याद आते हैं?


कभी तो दगा देते हैं


कभी पंख लगा कर यूँ मन में


उड़ जाते हैं जंगल में


जहाँ पर छूटा बचपन का एक कोना


और


दूर देश से आते बादल


न जानें कुछ कहते हैं।


बीता पल बचपन का


मैं फिर न पा सकूं


बस, एक याद बन कर रह जाए।


आज बैठता हूँ झुंड में कभी


तो मैं कहता हूँ


हाँ!


वो मेरी यादें हैं बचपन की
और सुनाने के लिए कहानी कुछ।


उन पलों को आज भी मैं भूलता नहीं


दे जाते हैं मन को दर्द कुछ


और


दूर देश से आते बादल


न जाने कुछ कह जाते हैं॥





महफूज़ अली

सोमवार, 8 जून 2009

मैं भी तुम्हे प्यार करता हूँ....

जब तुम मुझे प्यार करोगी,
सामने दीवार पर लगी कोई
तस्वीर
फिर जी उठेगी
और जी उठेंगे
अरमां
मेरे साथ
तेरे साथ॥

जब तुम मुझे प्यार करोगी
एक दूसरे की आँख में
दिए जलाकर
ढूँढने निकलेंगी सौगातें
रौशनी की।
फिर न ठाहरेगी कोई ओस की बूँद
बादलों पे
और बरस जाएँगी
तुम्हारे चेहरे पे जा कर॥

जब तुम मुझे प्यार करोगी
तो ये दुनिया ही बदल जायेगी
शोरोगुल में भी मैं वो बात सुन सकूंगा
जो तुम्हारे होठों से नहीं
निकलेगी तुम्हारी रूह से॥


जब तुम मुझे प्यार करोगी
तब
मुझे यह कहने की ज़रूरत नही होगी
की
हाँ!
मैं भी तुम्हे प्यार करता हूँ॥




(प्रस्तुत कविता प्रेरित है ...........)




महफूज़ अली

शनिवार, 6 जून 2009

यह क्या????

चाँद हमेशा की तरह मेरे साथ था,
पर , मैंने उससे कोई बात नहीं की
पत्थरों को देखा वो भी
बड़े मुलायम लगे
हवा मुझे पागल किए दे रही थी
पेडों का शोर अचानक बड़ा अच्छा लगा,
अन्दर का उमड़ता हुआ सा तूफ़ान
बाहर फैल गया॥




महफूज़ अली

मंगलवार, 19 मई 2009

हम फिर साथ खेलेंगे....

एक पल लिए तो मैं घबरा ही गया था, मेरे समझ में ही नहीं आ रहा था की क्या करुँ......... ?



मुझे लगा की अब सब ख़त्म!!!!!!!! डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया....... डॉक्टर ने चेक अप



करने के बाद कहा की अब देखो यह प्रॉब्लम में फिफ्टी/फिफ्टी का चांस है....... ............... .....



मैंने कहा की " डॉक्टर ! मैं इसके बगैर नहीं रह सकता........ कुछ भी करिए....... मैं इससे बहुत प्यार करता हूँ"......नहीं रह सकता मैं इसके बगैर......... ...... .........



डॉक्टर ने मुझे कुछ दवाएं लिखी और कहा की फ़ौरन मेयो हॉस्पिटल जा कर यह दवाएं लेते आईये.....



मैं परेशां ....... बदहवास..... कार में बैठे बैठे अजीब खयाल आ रहे थे..... मेयो पहुँचा... और फ़ौरन दवा ले के.....



वापस अपने डॉक्टर के पास पहऊँचा ............







थोडी देर के बाद डॉक्टर ने बताया की पैरालिटिक अटैक हुआ है....... इसलिए धड का निचला हिस्सा काम नही कर रहा है....... सुन के मेरे पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई...... मैं सोच में पड़ गया ............







मैं अब कुछ भी खोने की पोसिशन में नहीं हूँ ..... बहुत कुछ खोया है मैंने .... अब और नहीं ..... मैं यही सोच रहा था क्या सब मेरी ही किस्मत में लिखा है.... ? क्या मेरी ज़िन्दगी में सिर्फ खोना ही खोना है?


डॉक्टर ने कहा की आपके पास अब दो रास्ते हैं....या तो इसे एक इंजेक्शन दे के हमेशा के लिए इसको आज़ाद कर दें या फिर इसका लम्बे वक़्त तक इलाज कराएँ ...... और दोनों ही बहुत परेशानज़दा तरीका हैं....

पर मैंने फैसला किया की मैं इसका पूरा इलाज कराऊंगा....... और.....फिर मैं ICU की ओर बढ़ गया...... अन्दर जा के मैंने देखा..... उसकी आँखों में एहसान का भाव था.... शायद वो भी मेरे फैसले को समझ गया था....

मैं उसके पास पहुंचा और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा.....


और वो धीरे धीरे पूँछ हिला कर मेरा शुक्रिया अदा करने लगा....






मैंने धीरे से उससे कहा की हम फिर साथ खेलेंगे....






महफूज़ अली















सोमवार, 18 मई 2009

लेकिन, अब ? ? ? ? ? ? ? ?


बहुत पहले

ऐसा होता था

आदि काल में

शैतान पहचान लिया जाता था

भेष-भूषा और बोल-चाल से॥

लेकिन


अब ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?







महफूज़ अली
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